Sunday, 26 June 2016

खुश रहने के दस सूत्र l

"ख़ुश रहने के दस सूत्र "
*खुशवंत सिंह* के लिखे ज़िंदगी के दस सूत्र ।
इन दसों सूत्रों को पढ़ने के बाद पता चला कि सचमुच खुशहाल ज़िंदगी और शानदार मौत के लिए ये सूत्र बहुत ज़रूरी हैं।

1. *अच्छा स्वास्थ्य* - अगर आप पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं, तो आप कभी खुश नहीं रह सकते। बीमारी छोटी हो या बड़ी, ये आपकी खुशियां छीन लेती हैं।

2. *ठीक ठाक बैंक बैलेंस* - अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत अमीर होना ज़रूरी नहीं। पर इतना पैसा बैंक में हो कि आप जब चाहे बाहर खाना खा पाएं, सिनेमा देख पाएं, समंदर और पहाड़ घूमने जा पाएं, तो आप खुश रह सकते हैं। उधारी में जीना आदमी को खुद की निगाहों में गिरा देता है।

3. *अपना मकान* - मकान चाहे छोटा हो या बड़ा, वो आपका अपना होना चाहिए। अगर उसमें छोटा सा बगीचा हो तो आपकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल हो सकती है।

4. *समझदार जीवन साथी* - जिनकी ज़िंदगी में समझदार जीवन साथी होते हैं, जो एक-दूसरे को ठीक से समझते हैं, उनकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल होती है, वर्ना ज़िंदगी में सबकुछ धरा का धरा रह जाता है, सारी खुशियां काफूर हो जाती हैं। हर वक्त कुढ़ते रहने से बेहतर है अपना अलग रास्ता चुन लेना।

5. *दूसरों की उपलब्धियों से न जलना*  - कोई आपसे आगे निकल जाए, किसी के पास आपसे ज़्यादा पैसा हो जाए, तो उससे जले नहीं। दूसरों से खुद की तुलना करने से आपकी खुशियां खत्म होने लगती हैं।

6. *गप से बचना* - लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए। जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे और दूसरों की चुगली-निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा।

7. *अच्छी आदत* - कोई न कोई ऐसी हॉबी विकसित करें, जिसे करने में आपको मज़ा आता हो, मसलन गार्डेनिंग, पढ़ना, लिखना। फालतू बातों में समय बर्बाद करना ज़िंदगी के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अपराध है। कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे आपको खुशी मिले और उसे आप अपनी आदत में शुमार करके नियमित रूप से करें।

8. *ध्यान* - रोज सुबह कम से कम दस मिनट ध्यान करना चाहिए। ये दस मिनट आपको अपने ऊपर खर्च करने चाहिए। इसी तरह शाम को भी कुछ वक्त अपने साथ गुजारें। इस तरह आप खुद को जान पाएंगे।

9. *क्रोध से बचना* - कभी अपना गुस्सा ज़ाहिर न करें। जब कभी आपको लगे कि आपका दोस्त आपके साथ तल्ख हो रहा है, तो आप उस वक्त उससे दूर हो जाएं, बजाय इसके कि वहीं उसका हिसाब-किताब करने पर आमदा हो जाएं।

10. *अंतिम समय* - जब यमराज दस्तक दें, तो बिना किसी दुख, शोक या अफसोस के साथ उनके साथ निकल पड़ना चाहिए अंतिम यात्रा पर, खुशी-खुशी। शोक, मोह के बंधन से मुक्त हो कर जो यहां से निकलता है, उसी का जीवन सफल होता है।

*मुझे नहीं पता कि खुशवंत सिंह ने पीएचडी की थी या नहीं। पर इन्हें पढ़ने के बाद मुझे लगने लगा है कि ज़िंदगी के डॉक्टर भी होते हैं। ऐसे डॉक्टर ज़िंदगी बेहतर बनाने का फॉर्मूला देते हैं । ये ज़िंदगी के डॉक्टर की ओर से ज़िंदगी जीने के लिए दिए गए नुस्खे है।*... Shared by Anand Biyani Saheb. Har roj Milne/Share kiye jaane waale msgs ka SAAR tatwa diya hai Khushwant Singh ji ne . RADHE RADHE 👏👏👏

प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ मंत्र l

🌅🔔🌿प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह

  🔹 प्रात: कर-दर्शनम्🔹

कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती।
करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

         🔸पृथ्वी क्षमा प्रार्थना🔸

समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते।
विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥

🔺त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण🔺

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥

              ♥ स्नान मन्त्र ♥

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥

           🌞 सूर्यनमस्कार🌞

ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च
आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने।
दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम्
सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥

ॐ मित्राय नम:
ॐ रवये नम:
ॐ सूर्याय नम:
ॐ भानवे नम:
ॐ खगाय नम:
ॐ पूष्णे नम:
ॐ हिरण्यगर्भाय नम:
ॐ मरीचये नम:
ॐ आदित्याय नम:
ॐ सवित्रे नम:
ॐ अर्काय नम:
ॐ भास्कराय नम:
ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम:

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥

                🔥दीप दर्शन🔥

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥

दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥

            🌷 गणपति स्तोत्र 🌷

गणपति: विघ्नराजो लम्बतुन्ड़ो गजानन:।
द्वै मातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥
विनायक: चारूकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।
द्वादश एतानि नामानि प्रात: उत्थाय य: पठेत्॥
विश्वम तस्य भवेद् वश्यम् न च विघ्नम् भवेत् क्वचित्।

विघ्नेश्वराय वरदाय शुभप्रियाय।
लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय।
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं।
प्रसन्नवदनं ध्यायेतसर्वविघ्नोपशान्तये॥

        ⚡आदिशक्ति वंदना ⚡

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

           🔴 शिव स्तुति 🔴

कर्पूर गौरम करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।
सदा वसंतं हृदयार विन्दे,
भवं भवानी सहितं नमामि॥

              🔵 विष्णु स्तुति 🔵

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

            ⚫ श्री कृष्ण स्तुति ⚫

कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम।
नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणु करे कंकणम॥
सर्वांगे हरिचन्दनम सुललितम, कंठे च मुक्तावलि।
गोपस्त्री परिवेश्तिथो विजयते, गोपाल चूडामणी॥

मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्‌।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्‌॥

            ⚪ श्रीराम वंदना ⚪

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥

               ♦श्रीरामाष्टक♦

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा।
गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥
हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।
बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥

    🔱 एक श्लोकी रामायण 🔱

आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्॥
बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।
पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि श्री रामायणम्॥

           🍁सरस्वती वंदना🍁

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना॥
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम पातु सरस्वती भगवती
निःशेषजाड्याऽपहा॥

            🔔हनुमान वंदना🔔

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्‌।
दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्‌।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्‌।
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥

         🌹 स्वस्ति-वाचन 🌹

ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥

            ❄ शांति पाठ ❄

ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्‌ पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:,
पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्व (गुँ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥

॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥
🌅🌿🍁🌻🔔🚩
बहुत ही सुंदर संग्रह
इसे हर हिन्दू को अपने 'saver' में डाले या प्रिंट आउट ले । ऐसा संग्रह सरलता से नही मिलता ।
एक प्रति परिवार के बच्चों को भी दे ।
🌾🌻🌹🍀🌄🌘🔔🌻

Saturday, 25 June 2016

स्वामी समर्थ काकड़ आरती,तारक मंत्र, स्तोत्र

आजच्या सुदंर दिवसाची सुरवात
श्री स्वामी समर्थांच्या काकड आरतीने
आणि श्री स्वामी समर्थ तारक मंञाने करूया........
काकड आरती : श्री स्वामी समर्थांनचि.

ओवाळीतो काकड आरती ।
स्वमिसमार्था तुज प्रती ॥
चरण दावे जगत्पते ।
स्तवितो तुझी आदिमुर्ती ॥धृ॥
भक्तजन येउनिया । द्वारी उभे स्वामीराया ।
चरण तुझे पहावया ।तिष्ठती अतिप्रती ॥ओ ॥१!॥
भक्तांच्या कैवारे समर्थ निर्धारे ।
हात ठेउनिया चरणावरी ॥
गातो आम्ही तुझी स्तुती ॥ओ ॥२॥
पूर्णब्रम्ह देवाधिदेव ।निरंजना तुझा ठाव ॥ भक्तांसाठी देहभाव ।धरिसी तू विश्वपती ॥ओ॥३॥
स्वामी तूची कृपाधन । उठोनी देई दर्शन ॥
स्वमिदास चरण वंदून ।मागतसे भावभक्ती
॥ओ॥४॥
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         ॥ श्री स्वामी समर्थ तारक मंत्र ॥

नि:शंक हो । निर्भय हो मना रे । प्रचंड स्वामी बळ पाठीशी रे ॥
अतर्क्य अवधूत हे स्मरण गामी । अशक्य ही शक्य करतील स्वामी ॥१॥
जिथे स्वामी पाय तिथे न्यून काय । स्वयें भक्त प्रारब्ध घडवी ही माय ॥
आज्ञे वीणा काळ ना नेई त्याला । परलोकी ही ना भीती तयाला ॥2॥
उगाची भीतोसी भय हे पळू दे । जवळी उभी स्वामी शक्ति कळू दे॥
जगी जन्ममृत्यू असे खेळ ज्याचा । नको घाबरू तू असे बाळ त्याचा ॥३॥
खरा होई जागा । श्रद्धेसहित । कसा होशी त्याविणा । तू स्वामीभक्त ॥
कितीदा दिला बोल त्यांनीच हात । नको डगमगू । स्वामी देतील साथ ॥४॥
विभूती, नमन, नामध्यानाधी, तीर्थ । स्वामीच या पंचप्राणामृतात ॥
हे तीर्थ घे आठवी रे प्रचिती । न सोडी कदा स्वामी जया घेई हाती ॥५॥

    ।। ब्रम्हांडनायक श्री स्वामी समर्थ ।।
ॐ श्री सदगुरू अक्कलकोट निवासी राजाधिराज योगीराज श्री स्वामी समर्थ महाराज कि जय ....॥
॥अनंत कोटी ब्रम्हांडनायक भक्तवत्सल भक्ताभिमानी श्री पाद श्रीवल्लभ विजय दत्त गुरूदेव दत्त समर्थ॥
      ॥अवधुत चिँतन श्री गुरूदेव दत्त ॥

        ॥  श्री अक्कलकोटस्वामी स्तोत्र ॥

     ॐ श्री अक्कलकोटस्वामी समर्थास नम: ।

ॐनमो श्रीगजवदना ।गणराया गौरीनंदना विघ्नेशा भवभयहरणा।नमन माझे
साष्टागी॥ १॥
नंतर नमिली श्री सरस्वती । जगन्माता भगवती । ब्रम्ह्य कुमारी वीणावती । विद्यादात्री विश्वाची ॥२॥
नमन तैसे गुरुवर्या । सुखनिधान सदगुरुराया। स्मरूनी त्या पवित्र पायां । चित्तशुध्दी जाहली ॥३॥
थोर ॠषिमुनी संतजन बुधगण आणि
सज्जन । करुनी तयांसी नमन । ग्रंथरचना आरंभिली ॥४॥
श्री अक्कलकोट स्वामीराया स्मरुनी तुमच्या पवित्र पायां । स्तोत्र महात्म्य तुमचे गावया। प्रारंभ आता करतो मी ॥५॥
नांव गांव खुद्द स्वामींचे । किंवा त्यांच्या मातापित्यांचे ॥ कोणालाच ठाऊक नाही
साचें । अंदाज मात्र अनेक ॥६॥
त्यांच्या जन्मासंबंधाने, आख्यायिका लिहिली एकानें । तीच सत्य मानुनी प्रत्येकाने। समाधान मानावे ॥७॥
म्हणे उत्तर भारती एका स्थानी । घनदाट कर्दळीच्या बनीं । स्वामी प्रगटले वारुळांतुनी। लाकुडतोड्याच्या निमित्ताने ॥८॥
कुर्‍हाडीचा घाव बसून, त्याचा राहिला कायमचा वण । आगळी ती अवतार खूण । प्रत्यक्ष पाहीली सर्वांनी ॥९॥
एका भक्तानें केला प्रश्न, स्वामी तुमची जात कोण । तेव्हां दिलें उत्तर छान । स्वमुखेंच समर्थानी ॥१०॥
मी यजुवेदी ब्राम्हण । माझे नांव नृसिंहभान । काश्यप गोत्र राशी मीन । ऐसें स्वामी
म्हणाले ॥११ ॥
खरें खोटें देव जाणे । बरें नाही खोलांत
शिरणें ।ईश्ववरी करणीची कारणें । आपण काय शोधावी ॥१२॥
दत्तात्रया तुम्ही निराकार निर्गुण । नरदेह तरीही केला धारण । सकळं भूप्रदेश केला पावन । आपुल्या चरणस्पर्शाने ॥१३॥
नंतर स्वामी निघाले तिथून । तीर्थयात्रेसी केले प्रयाण। दत्तात्रयाचे प्रत्येक ठिकाण । प्रत्यक्ष फिरुनी पाहिलें ॥१४॥
दत्तवास्तव्य जेथे निरंतर । तो थोर पर्वत गिरनार । तेथेच गेले अगोदर । नंतर फिरले इतरत्र ॥१५॥
यात्रेचे प्रवास संपले । तेव्हा मंगळवेढ्यासी आले । खतेथे थोडे दिवस राहिले दामाजीच्या गांवात ॥१६॥
काही काळ तिथे गेला । पुण्यवंतांना प्रभाव कळला । जनसमुदाय भजनीं लागला । साक्षात्कारी यतीच्या ॥१७ ॥
पुढे अक्कलकोट हें । वास्तव्याचे झाले ठिकाण । अखेरपर्यंत तिथेंच राहून । अनंत लीला दाखविल्या ॥१८॥
तेजःपुंज शरीर गोमटें, सरळ नासिका कान मोठे । आजानुबाहू कौपिन छोटे । दिगंबर असती अनेकदां ॥१९॥
स्वामी समर्थ अक्कलकोटचे । चवथे अवतार दत्तात्रयाचे । तीन अवतार यापूर्वीचे । गुरुचरित्री वर्णिले ॥२०॥
पहिले दत्तात्रेय, दुसरे श्रीपादवल्लभ । नृसिंहसरस्वती हे तिसरे नांव शुभ ।गाणगापूर दर्शन देवदुर्लभ । जागृत दत्तस्थान ते॥२१॥
तेथे होउनी साक्षात्कार । पहावयासी येती चवथा अवतार।अक्कलकोट पुण्यभूमि थोर। जेथे प्रत्यक्ष दत्त वसे॥२२ ॥
अक्कलकोटी नित्य राहूनी । अगाध गूढ लीला करूनी । भक्तांसी साक्षात्कार देऊनी | गुप्त झाले अनेकदा ॥२३॥
नास्तिक होते कोणी त्यांना । चमत्कार दाखविले नाना । शेवटी कराया क्षमायाचना॥ लागले स्वामी चरणांसी ॥२४॥
स्वामी सर्वसाक्षी उदार । साक्षात दत्ताचे अवतार । कधी सौम्य कधी उग्रतर । स्वरुप दाविलें दासांना ॥२५॥
ज्यांनी त्यांची सेवा केली । त्यांची कुळे पावन झाली । जन्मोजन्मीची पापें जळली । पुण्यराशी मिळाल्या ॥२६॥
सत्पुरुषाची करणी अगाध । वाणी गूढ निर्विवाद । झाल्याविण कृपाप्रसाद । अर्थ त्याचा समजेना ॥२७॥
स्वामींचे बोलणे थोडें । जणूं काय कठीण कोडें । अर्थ काढावे तितुके थोडे । त्यात भविष्य असे भरलेलें ॥२८॥
जाणणारे तेच जाणिती । घेती त्यांच्या संकेताची प्रचिती । ज्याचा तोच उमजे चित्तीं। इतरां अर्थबोध होईना ॥२९॥
कोणाकोणाला पादुका दिधल्या । कोणाला वाहिल्या लाखोल्या । कोणाच्या मस्तकी मारिल्या । पायांतल्या वाहाणाही ॥३०॥
ज्याच्या त्याच्या भाग्याप्रमाणें । स्वामीनी दिले भरपूर देणें । कोणा पुत्र कोणा सोनेनाणे। कोणा जीवनदानही दिलें त्यांनी ॥३१॥
अनेकांच्या व्याधी केल्या दूर । अनेकांना दाखविले चमत्कार । अनेकांना शिक्षा घोर । केल्या त्यांनी अनेकदा ॥३२॥
सर्व साक्षी अंतर्ज्ञानी । पूर्णब्रम्ह्य ब्रम्ह्यज्ञानी । म्हणूनच हव्या त्या ठिकाणी ।दर्शन दिधलें भक्ताना ॥३३॥
न सांगता सर्व जाणिले । ज्याचें त्याला योग्य उत्तर दिलें । लोण्याहुनी मृदु ह्रदय द्रवलें । दु:खी कष्टी जीवांसाठी ॥३४॥
दयेचा अथांग सागर । भक्तांसाठी परम उदार। अनेकांचा केला उध्दार । सदुपदेश दिक्षा देऊनी ॥३५॥
स्वामीराया दत्तात्रेया । तुमच्या कृपेची असावी छाया । हीच प्रार्थना तुमच्या पायां। मागणे नाही आणखी॥३६॥
मजवरी होता कृपादृष्टी । दत्तमय भासेल सर्व सृष्टी । सुखसंपत्तीची होईल वृष्टी । सकल सिध्दी लाभती ॥३७ ॥
ऐसी श्रध्दा माझे मनी । उपजली आहे आतां म्हणुनीं । मिठी घातली तव चरणीं । धाव पाव समर्था तूं ॥३८॥
तुमची करावी कैसी सेवा । हे मज ठाऊक नाही देवा । ओळखुनी माझ्या भोळ्या भावा। वरदहस्त ठेवा मस्तकीं ॥३९॥
संसार तापें पोळलों भारी, दूर करा ही दु:खे सारी । तुमच्यावीण माझा कैवारी । अन्य कोणी दिसेना ॥४०॥
तुमचे पाय माझी काशी । पंढरपूर सर्व तीर्थे तशी । आहेत तुमच्या चरणांपाशी । मग यात्रेस जाऊ कशाला ॥४१॥
अक्कल्कोटचे समर्थ स्वामी । रंगून जातां त्यांचे नामीं । ब्रम्हा विष्णू शिवधामी । सर्व भक्ती पोंचते ॥४२॥
स्वामी समर्थांची मूर्ति आठवावी । त्यांचे पायी दृढ श्रध्दा ठेवावी । आणी आपली भावना असावी । मनोभावें ऐसी कीं ॥४३॥
पाठीशीं आहेत अक्कलकोट स्वामी । उगीच कशास भ्यावे मी।काहींच पडणार नाही कमी। समर्थांच्या दासासी॥४४॥
भाग्यवान ते जे लागले भजनी । वादविवाद केले पंडितांनी । मग एकमुखानें सर्वांनी। मान्य केली थोर योग्यता॥४५॥
वेदांताचा अर्थ लाविला । पंडितांचा ताठा जिरविला । भाविक भक्तांना दिधला । धीर अनेक संकटी ॥४६॥
स्वामी तुमचे चरित्र आगळें । अतर्क्य अलौकिक जगावेगळे । त्यांत प्रेमाचे सागर सांठले। धन्य धन्य ज्यांना उमजलें ते॥४७॥
बाळप्पा चोळप्पादि सर्वांनी ।लहान मोठ्या अधिकार्‍यांनी । गरीबांपासून श्रीमंतांनी। सेवा केली यथाशक्ती ॥४८॥
जे जे तुमच्या भजनीं लागले । त्यांचे त्यांचे कल्याण झालें । हवें हवें ते सारें मिळाले । श्री समर्थ कृपेनें ॥४९॥
पुढे संपल्या लीला संपले खेळ । ताटातुटीची आली वेळ ।स्वामी म्हणजे परब्रम्ह्य केवळ। परब्रह्म्यांत मिळालें ॥५०॥
शके अठराशें बहुधान्यनाम संवत्संरी । चैत्र वद्य त्रयोदशी मंगळवारी । पुण्य घटिका तिसर्‍या प्रहरी।स्वामी गेले निजधामा ॥५१॥
बोलता बोलता आला अंतकाळ । प्रकृतीत झाली चलबिचल । क्षणात पापण्या झाल्या अचल । निजानंदी झाले निमग्न ॥५२॥
वचनपूर्तींसाठी निर्णयानंतर । पांचवा दिवस शनिवार । स्वामी प्रगटले निलेगांवाबाहेर । दिलें दर्शन भाऊसाहेबांसी ॥५३॥
ऐसा यती दत्त दिगंबर । संपवूनी आपूला अवतार । निजधामा गेला निरंतर । भक्त झाले पोरके ॥५४॥
बातमी जेव्हा सर्वत्र पसरली । जनता शोकाकुल झाली ।सर्व भक्तमंडळी हळहळली। अन्नपाणीही सुचेना ॥५५॥
गावोगांवीची भक्तमंडळी । अक्कलकोटी गोळा झाली ।समर्थांची समाधी पाहिली ।आपल्या साश्रू नयनांनी ॥५६॥
चवथा अवतार संपला । तरीही चैतन्यरुपें तिथेच राहिला ।अक्कलकोट पुण्यभूमीला। क्षेत्रत्वा प्राप्त जाहलें ॥५७ ॥
अजूनही जे येती समाधीदर्शना । त्यांच्या व्याधी आणी विवंचना । संकटे आणी दु:खे नाना ।स्वामी दूर करतात ॥५८॥
याचे असती असंख्य दाखले ।अनेकांनी अनुभवले । म्हणूनी महाराजांची पाऊले । आपणही वंदूंया ॥५९॥
नम्र होउनी त्यांचे चरणीं ।कळकळने करुंया विनवणी । स्वामींना यावी करुणा म्हणूनी । प्रार्थना त्यांना करुंया ॥६०॥
जयजय दत्ता अवधूता ।अक्कलकोट स्वामी समर्था । सदगुरु दिगंबरा भगवंता । दया करी गा मजवरी ॥६१॥
अनेकांच्या संकटी आला धावून । आता माझी प्रार्थना ऐकून । समर्थराया देई दर्शन । दूर लोटु नको मला ॥६२॥
व्यवहारी मी जगतो जीवन । अनेक पापें घडती हातून । तव नामाचें होते विस्मरण। क्षमा याची असावी ॥६३॥
सदगुरुराया कृपा करावी । तुमची सेवा नित्य घडावी । ऐसी बुध्दी मजला द्यावी । पापे सर्व पळावी ॥६४॥
सुखाचें व्हावे जीवन ऐहिक । धनदौलत मिळावी, मिळावे पुत्रपौत्रसुख । गृहसौख्य आणी वाहनसुख।अंती सदगति लाभावी॥६५॥
तुम्ही प्रत्यक्ष कैवल्य ठेवा । म्हणुनी याचना करतों देवा । उदार मनाने वर द्यावा । आणी तथास्तु म्हणावे ॥६६॥
तुमची होतां कृपा पूर्ण । जीवन माझें होईल धन्य । म्हणुनी आलों तव पायी शरण। दत्तराया दयाघना ॥६७॥
मी एक मानव सामान्य । तुमची सेवा नित्य घडावी म्हणून ।या पोथीचें करितों वाचन। दान द्या तुमच्या कृपेचे ॥६८॥
वेडीवाकुडी माझी सेवा ।स्वीकारावी स्वामी देवा । वरदहस्त नित्य मस्तकीं ठेवा । हीच अंती विनंती ॥६९॥
शके अठराशे नव्याण्ण्व वर्षी । चैत्रमासीं शुक्लपक्षी ।शुभ रामनवमी दिवशी ।पोथी पूर्ण झाली ही ॥७०॥
स्वामींचे चित्र ठेऊनी पुढ्यांत । किंवा स्वामींच्या एखाद्या मठांत ।बसुनी ही पोथी वाचावी मनांत । इच्छा सफल होईल ॥७१॥
माणिकप्रभू , साई शिरडीश्वर । आणी अक्कलकोट्चे दिगंबर । एकाच तत्वाचे तीन अविष्कार । भेद त्यांत नसे मुळी ॥७२॥
एकाची करितां भक्ती ।तिघांनाही पावते ती । ऐसी ठेऊनी आपली वृत्ती । पोथी नित्य वाचावी ॥७३॥
या पोथीचे करितां नित्य पठण । प्रत्यक्ष स्वामी होतील प्रसन्न । करतील सर्व मनोरथ पूर्ण । सत्य सत्य वाचा ही ॥७४॥

ॐ श्री अक्कलकोटस्वामी समर्थापर्णमस्तु ॥ शुभं भवतु ॥ ॐ शांति:शांति:शांति: ॥

॥" श्री अक्कलकोटस्वामी स्तोत्र - माहात्म्य सम्पूर्ण "॥

Thursday, 23 June 2016

Other ways to say " I. don't know.'

Other ways to say 'I don't know': ('I don't know' म्हणण्याचे इतर प्रकार:) 1. I have no idea. (मला काहीच कल्पना नाही.) E.g. I have no idea how the cat entered my room. (उदा: मांजर माझ्या खोलीत कशी आली याची मला काहीच कल्पना नाही.) 2. I have no clue. (मला त्याबाबत काहीच माहिती नाही.) E.g. I think we should hire a taxi, I have no clue about the route. (उदा: मला वाटते कि, आपण टॅक्सी घेतली पाहिजे, मला जाण्याच्या मार्गाबद्दल काहीच माहिती नाही.) 3. Beats me. (मला कळलेच नाही.) E.g. It beats me how they finished before us. (उदा: त्यांनी आपल्याआधी कसे पूर्ण केले हे मला समजलेच नाही.) 4. I'm unsure. (मला त्याबाबत खात्री नाही.) E.g. I will let you know once I finalize the plan, I'm unsure about my holidays. (उदा: माझी योजना ठरली कि, मी तुला कळवेन पण मला माझ्या सुट्यांबाबत खात्री नाही.) 5. That's a good question. (तो एक चांगला प्रश्न आहे.) E.g. Ajay: How did she get here? She doesn't even know where I stay. Ram: That's a good question. (उदा: अजय: ती इथे कशी आली? मी कोठे राहतो हे तिला माहितदेखील नाही. राम: तो एक चांगला प्रश्न आहे.) 6. I haven't the faintest idea. (मला सुतराम कल्पना नव्हती.) E.g. I didn't have the faintest idea where I was or which way I was going – I simply knew I had to get away. (उदा: मला सुतराम कल्पनादेखील नव्हती कि मी कोणत्या मार्गाने जात आहे - मला फक्त एवढेच माहिती होते कि, मला दूर निघून जायचे आहे.) 7. Who knows? (काय माहित?) E.g. Who knows where will I end up going! (उदा: मी कुठे पोहोचेन काय माहित?) 8. Your guess is as good as mine. (तुझा अंदाज माझ्याइतकाच चांगला आहे.) E.g. Don't ask me about the directions, your guess is as good as mine. (उदा: मला कसे जायचे त्याबद्दल विचारू नका, तुमचा अंदाज माझ्याइतकाच चांगला आहे.) 9. I'm clueless (मला काहीच सुगावा नाही.) E.g. I'm clueless about course. (उदा: मला अभ्यासक्रमाबद्दल काहीच माहिती नाही.) 10. How would I know? (मला कसे काय माहित असेल?) E.g. You didn't tell me about your plans, how would I know you were here on the weekend? (उदा: तू मला तुझ्या योजनेबद्दल सांगितले नाहीस, मग मला कसे काय माहित असेल कि शनिवार-रविवारी तू इकडे येशील?) 11. It's anyone's guess (तो कुणाचाही अंदाज असू शकतो) E.g. It's anyone's guess what his next book will be about. (उदा: तो कुणाचाही अंदाज असू शकतो कि, त्याचे पुढचे पुस्तक कशाबद्दल असेल.)

Tuesday, 21 June 2016

10 ways to say " I miss you "

10 ways to say 'I miss you': 1. It is not the same without you (तुझ्याशिवाय त्याला अर्थ नाही) 2. I wish you were here (तू इथे असतास तर बरे झाले असते) 3. There is a void in my life without you (तुझ्याशिवाय माझ्या आयुष्यात पोकळी आहे) 4. My life isn't complete with you gone (तुझ्या जाण्याने माझे आयुष्य अपूर्णच आहे) 5. I think about you constantly, whether it's with my mind or my heart. (माझे हृदय असो कि, माझे मन असो, मी सतत तुझाच विचार करते/करतो) 6. All I want is you to be here. (मला फक्त तू इथे माझ्यासमोर हवा/हवी आहेस) 7. Feels like forever since I last saw you. (तुला शेवटचे भेटल्यानंतर जणू खूप काळ लोटला आहे असे वाटते) 8. Counting days till I get to see you again! (तुला पुन्हा भेटेपर्यंत मी दिवस मोजत राहीन) 9. Can't wait to see you again. (तुला कधी भेटेन असे वाटत आहे.) 10. You've been on my mind / You are always on my mind (तू नेहमीच माझ्या मनात आहेस)

Friday, 10 June 2016

हवामानाशी सम्बंधित वाकप्रचार

Here's a list of idioms that are drawn from weather expressions but convey different messages: (हवामानाशी संबंधित परंतु वेगळा संदेश देणाऱ्या वाक्प्रचारांची यादी इथे दिली आहे.) 1. As right as rain: to feel fine and healthy. (ठीक आणि स्वस्थ वाटून घेणे.) E.g. Don't worry about me, I'm as right as rain after my knee operation. (उदा: माझ्याबद्दल काळजी करू नकोस, माझ्या गुडघ्याच्या शस्त्रक्रियेनंतर मी एकदम ठीक आणि स्वस्थ आहे.) 2. Be a breeze: to be very easy to do. (करण्यासाठी एकदम सोपे असे) E.g. Our English exam was a breeze. I'm sure I'll score well. (उदा: आमची इंग्रजीची परीक्षा फारच सोपी होती. मला खात्री आहे कि, मला छानच गुण मिळतील.) 3. Be snowed under: to have so much to do that you are having trouble doing it all. (खूप कामे शिल्लक असल्याने कोणते पूर्ण करावे याचा गोंधळ उडणे) E.g. I'm snowed under right now because two of my colleagues are on holiday. (उदा: माझे दोन सहकारी सुट्टीवर असल्याने आज कामाच्या बोज्यामुळे माझा गोंधळ उडत आहे.) 4. Break the ice: to say or do something to make someone feel relaxed or at ease in a social setting. (सामाजिक स्तरावर एखाद्या व्यक्तीला आरामदायी किंवा सोपे वाटावे यासाठी काहीतरी बोलणे किंवा करणे) E.g. He offered to get her a drink to help break the ice. (उदा: दोघांमधील शांतता भंग करण्यासाठी त्याने तिला एक ड्रिंक देऊ केले.) 5. Calm before the storm: the quiet, peaceful period before a moment of great activity or mayhem. (वादळापूर्वीची शांतता) E.g. The in-laws were about to arrive with their kids so she sat on the sofa with a cup of coffee enjoying the calm before the storm. (उदा: सासरकडील लोक त्यांच्या मुलांसह काही वेळातच येणार असल्याने ती सोफ्यावर बसली आणि कॉफीची पिण्याची मजा लुटत वादळापूर्वीची शांतता अनुभवू लागली.) 6. Chase rainbows: when someone tries to do something that they will not achieve (जेव्हा एखादी व्यक्ती ती जे साध्य करू शकणार नाही ते साध्य करण्याचा प्रयत्न करते) E.g. I think she's chasing rainbows if she thinks she can get into Oxford given her horrible grades. (उदा: तिला मिळालेले गुण पाहता ऑक्सफर्डमध्ये तिला प्रवेश मिळणे म्हणजे इंद्रधनुष्य मागे टाकण्यासारखेच आहे.) 7. Come rain or shine: you can depend on someone to be there no matter what or whatever the weather. (वातावरण काय असेल याचा काहीही फरक न पडता कोणीतरी तुमच्यासोबत असेल यावर अवलंबून राहणे.) E.g. I'll be there to help you come rain or shine. (काहीही झाले तरी तुला मदत करण्यासाठी मी तिथे तुझ्यासोबत असेन.)

Wednesday, 1 June 2016

श्री भैरव चालीस

यह एप्प वेद-पुराण की कथाओं का भंडार है. चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर, चार वेद, 18 पुराण, 108 उपनिषद, भगवत् गीता, रामायण, अद्भुत यन्त्र व मंत्र, ज्योतिष व वास्तु शास्त्र के निचोड़ से प्रभुभक्तों द्वारा श्रीचरणों में समर्पित श्रद्धा के कुछ पुष्प हैं सनातन अमृत'. वास्तु ,ज्योतिष व किसी भी समस्या का प्रश्न पूछने के लिए हमें मेल करें. हमें पत्र लिखे का बटन एप्लीकेशन में उपलब्ध है. एंड्राइड मोबाइल एप्प कृप्या डाउनलोड व इनस्टॉल करें: http://goo.gl/e54Ue8 यदि ये लिंक नहीं काम करें तो कृपया अपने मोबाइल के प्लेस्टोर (Play Store Application) में जाकर Sanatan Amrit खोजें और एप्लीकेशन डाउनलोड कर लें. यदि आपके पास एंड्राइड मोबाइल नहीं है तो सनातन अमृत की नई कथा Whatsapp पर पाने के लिए 9457671111 नंबर Sanatan Amrit के नाम से save करके Whatsapp पर Sanatan Amrit लिखकर हमें इसी नंबर पर भेज दें.