Monday, 22 January 2018

आदित्य हृदय स्तोत्र

*आदित्य हृदय स्तोत्र संपूर्ण पाठ*

आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ नियमित  करने से अप्रत्याशित लाभ मिलता है।  आदित्य हृदय स्तोत्र के पाठ से नौकरी में पदोन्नति, धन प्राप्ति, प्रसन्नता, आत्मविश्वास के साथ-साथ समस्त कार्यों में सफलता मिलती है।  हर मनोकामना सिद्ध होती है। सरल शब्दों में कहें तो आदित्य ह्रदय स्तोत्र हर क्षेत्र में चमत्कारी सफलता देता है। पढ़ें संपूर्ण पाठ...   

*विनियोग*

ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषि: अनुष्टुप्छन्दः आदित्यह्रदयभूतो
भगवान् ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्माविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः

*पूर्व पिठिता*

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्‌ ।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्‌ ॥1॥

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्‌ ।
उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा ॥2॥

राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम्‌ ।
येन सर्वानरीन्‌ वत्स समरे विजयिष्यसे ॥3॥

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्‌ ।
जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्‌ ॥4॥

सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम्‌ ।
चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्‌ ॥5॥

*मूल -स्तोत्र*

रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्‌ ।
पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्‌ ॥6॥

सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: ।
एष देवासुरगणांल्लोकान्‌ पाति गभस्तिभि: ॥7॥

एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव: स्कन्द: प्रजापति: ।
महेन्द्रो धनद: कालो यम: सोमो ह्यापां पतिः ॥8॥

पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु: ।
वायुर्वहिन: प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर: ॥9॥

आदित्य: सविता सूर्य: खग: पूषा गभस्तिमान्‌ ।
सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर: ॥10॥

हरिदश्व: सहस्त्रार्चि: सप्तसप्तिर्मरीचिमान्‌ ।
तिमिरोन्मथन: शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान्‌ ॥11॥

हिरण्यगर्भ: शिशिरस्तपनोऽहस्करो रवि: ।
अग्निगर्भोऽदिते: पुत्रः शंखः शिशिरनाशन: ॥12॥

व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजु:सामपारग: ।
घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः ॥13॥

आतपी मण्डली मृत्यु: पिगंल: सर्वतापन:।
कविर्विश्वो महातेजा: रक्त:सर्वभवोद् भव: ॥14॥

नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावन: ।
तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्‌ नमोऽस्तु ते ॥15॥

नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम: ।
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम: ॥16॥

जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम: ।
नमो नम: सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नम: ॥17॥

नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: ।
नम: पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते ॥18॥

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे ।
भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नम: ॥19॥

तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने ।
कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥20॥

तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे ।
नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥21॥

नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभु: ।
पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभि: ॥22॥

एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: ।
एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्‌ ॥23॥

देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च ।
यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभु: ॥24॥

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च ।
कीर्तयन्‌ पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव ॥25॥

पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगप्ततिम्‌ ।
एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि ॥26॥

अस्मिन्‌ क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि ।
एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम्‌ ॥27॥

एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्‌ तदा ॥
धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान्‌ ॥28॥

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्‌ ।
त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्‌ ॥29॥

रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम्‌ ।
सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत्‌ ॥30॥

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना: परमं प्रहृष्यमाण: ।
निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥31॥

।।सम्पूर्ण ।।

*हिंदी अनुवाद*

1,2 उधर श्रीरामचन्द्रजी युद्ध से थककर चिंता करते हुए रणभूमि में खड़े हुए थे । इतने में रावण भी युद्ध के लिए उनके सामने उपस्थित हो गया । यह देख भगवान् अगस्त्य मुनि, जो देवताओं के साथ युद्ध देखने के लिए आये थे, श्रीराम के पास जाकर बोले ।

3 सबके ह्रदय में रमन करने वाले महाबाहो राम ! यह सनातन गोपनीय स्तोत्र सुनो ! वत्स ! इसके जप से तुम युद्ध में अपने समस्त शत्रुओं पर विजय पा जाओगे ।

4,5  इस गोपनीय स्तोत्र का नाम है ‘आदित्यहृदय’ । यह परम पवित्र और संपूर्ण शत्रुओं का नाश करने वाला है । इसके जप से सदा विजय कि प्राप्ति होती है । यह नित्य अक्षय और परम कल्याणमय स्तोत्र है । सम्पूर्ण मंगलों का भी मंगल है । इससे सब पापों का नाश हो जाता है । यह चिंता और शोक को मिटाने तथा आयु का बढ़ाने वाला उत्तम साधन है ।

6 भगवान् सूर्य अपनी अनंत किरणों से सुशोभित हैं । ये नित्य उदय होने वाले, देवता और असुरों से नमस्कृत, विवस्वान नाम से प्रसिद्द, प्रभा का विस्तार करने वाले और संसार के स्वामी हैं । तुम इनका रश्मिमंते नमः, समुद्यन्ते नमः, देवासुरनमस्कृताये नमः, विवस्वते नमः, भास्कराय नमः, भुवनेश्वराये नमः इन मन्त्रों के द्वारा पूजन करो।

7 संपूर्ण देवता इन्ही के स्वरुप हैं । ये तेज़ की राशि तथा अपनी किरणों से जगत को सत्ता एवं स्फूर्ति प्रदान करने वाले हैं । ये अपनी रश्मियों का प्रसार करके देवता और असुरों सहित समस्त लोकों का पालन करने वाले हैं ।

8,9 ये ही ब्रह्मा, विष्णु शिव, स्कन्द, प्रजापति, इंद्र, कुबेर, काल, यम, चन्द्रमा, वरुण, पितर , वसु, साध्य, अश्विनीकुमार, मरुदगण, मनु, वायु, अग्नि, प्रजा, प्राण, ऋतुओं को प्रकट करने वाले तथा प्रकाश के पुंज हैं ।

10,11,12,13,14,15 इनके नाम हैं आदित्य(अदितिपुत्र), सविता(जगत को उत्पन्न करने वाले), सूर्य(सर्वव्यापक), खग, पूषा(पोषण करने वाले), गभस्तिमान (प्रकाशमान), सुवर्णसदृश्य, भानु(प्रकाशक), हिरण्यरेता(ब्रह्मांड कि उत्पत्ति के बीज), दिवाकर(रात्रि का अन्धकार दूर करके दिन का प्रकाश फैलाने वाले), हरिदश्व, सहस्रार्चि(हज़ारों किरणों से सुशोभित), सप्तसप्ति(सात घोड़ों वाले), मरीचिमान(किरणों से सुशोभित), तिमिरोमंथन(अन्धकार का नाश करने वाले), शम्भू, त्वष्टा, मार्तण्डक(ब्रह्माण्ड को जीवन प्रदान करने वाले), अंशुमान, हिरण्यगर्भ(ब्रह्मा), शिशिर(स्वभाव से ही सुख प्रदान करने वाले), तपन(गर्मी पैदा करने वाले), अहस्कर, रवि, अग्निगर्भ(अग्नि को गर्भ में धारण करने वाले), अदितिपुत्र, शंख, शिशिरनाशन(शीत का नाश करने वाले), व्योमनाथ(आकाश के स्वामी), तमभेदी, ऋग, यजु और सामवेद के पारगामी, धनवृष्टि, अपाम मित्र (जल को उत्पन्न करने वाले), विंध्यवीथिप्लवंगम (आकाश में तीव्र वेग से चलने वाले), आतपी, मंडली, मृत्यु, पिंगल(भूरे रंग वाले), सर्वतापन(सबको ताप देने वाले), कवि, विश्व, महातेजस्वी, रक्त, सर्वभवोद्भव (सबकी उत्पत्ति के कारण), नक्षत्र, ग्रह और तारों के स्वामी, विश्वभावन(जगत कि रक्षा करने वाले), तेजस्वियों में भी अति तेजस्वी और द्वादशात्मा हैं। इन सभी नामो से प्रसिद्द सूर्यदेव ! आपको नमस्कार है

16 पूर्वगिरी उदयाचल तथा पश्चिमगिरी अस्ताचल के रूप में आपको नमस्कार है । ज्योतिर्गणों (ग्रहों और तारों) के स्वामी तथा दिन के अधिपति आपको प्रणाम है ।

17 आप जयस्वरूप तथा विजय और कल्याण के दाता हैं । आपके रथ में हरे रंग के घोड़े जुते रहते हैं । आपको बारबार नमस्कार है । सहस्रों किरणों से सुशोभित भगवान् सूर्य ! आपको बारम्बार प्रणाम है । आप अदिति के पुत्र होने के कारण आदित्य नाम से भी प्रसिद्द हैं, आपको नमस्कार है ।

18 उग्र, वीर, और सारंग सूर्यदेव को नमस्कार है । कमलों को विकसित करने वाले प्रचंड तेजधारी मार्तण्ड को प्रणाम है ।

19 आप ब्रह्मा, शिव और विष्णु के भी स्वामी है । सूर आपकी संज्ञा है, यह सूर्यमंडल आपका ही तेज है, आप प्रकाश से परिपूर्ण हैं, सबको स्वाहा कर देने वाली अग्नि आपका ही स्वरुप है, आप रौद्ररूप धारण करने वाले हैं, आपको नमस्कार है ।

20 आप अज्ञान और अन्धकार के नाशक, जड़ता एवं शीत के निवारक तथा शत्रु का नाश करने वाले हैं । आपका स्वरुप अप्रमेय है । आप कृतघ्नों का नाश करने वाले, संपूर्ण ज्योतियों के स्वामी और देवस्वरूप हैं, आपको नमस्कार है ।

21 आपकी प्रभा तपाये हुए सुवर्ण के समान है, आप हरी और विश्वकर्मा हैं, तम के नाशक, प्रकाशस्वरूप और जगत के साक्षी हैं, आपको नमस्कार है

22 रघुनन्दन ! ये भगवान् सूर्य ही संपूर्ण भूतों का संहार, सृष्टि और पालन करते हैं । ये अपनी किरणों से गर्मी पहुंचाते और वर्षा करते हैं ।

23 ये सब भूतों में अन्तर्यामी रूप से  स्थित होकर उनके सो जाने पर भी जागते रहते हैं । ये ही अग्निहोत्र तथा अग्निहोत्री पुरुषों को मिलने वाले फल हैं ।

24 देवता, यज्ञ और यज्ञों के फल भी ये ही हैं । संपूर्ण लोकों में जितनी क्रियाएँ होती हैं उन सबका फल देने में ये ही पूर्ण समर्थ हैं ।

25 राघव ! विपत्ति में, कष्ट में, दुर्गम मार्ग में तथा और किसी भय के अवसर पर जो कोई पुरुष इन सूर्यदेव का कीर्तन करता है, उसे दुःख नहीं भोगना पड़ता ।

26 इसलिए तुम एकाग्रचित होकर इन देवाधिदेव जगदीश्वर कि पूजा करो । इस आदित्यहृदय का तीन बार जप करने से तुम युद्ध में विजय पाओगे ।

27 महाबाहो ! तुम इसी क्षण रावण का वध कर सकोगे । यह कहकर अगस्त्यजी जैसे आये थे वैसे ही चले गए ।

28,29,30 उनका उपदेश सुनकर महातेजस्वी श्रीरामचन्द्रजी का शोक दूर हो गया । उन्होंने प्रसन्न होकर शुद्धचित्त से आदित्यहृदय को धारण किया और तीन बार आचमन करके शुद्ध हो भगवान् सूर्य की और देखते हुए इसका तीन बार जप किया । इससे उन्हें बड़ा हर्ष हुआ । फिर परम पराक्रमी रघुनाथ जी ने धनुष उठाकर रावण की और देखा और उत्साहपूर्वक विजय पाने के लिए वे आगे बढे । उन्होंने पूरा प्रयत्न करके रावण के वध का निश्चय किया ।

31 उस समय देवताओं के मध्य में खड़े हुए भगवान् सूर्य ने प्रसन्न होकर श्रीरामचन्द्रजी की और देखा और निशाचरराज रावण के विनाश का समय निकट जानकर हर्षपूर्वक कहा – ‘रघुनन्दन ! अब जल्दी करो’ ।

इस प्रकार भगवान् सूर्य कि प्रशंसा में कहा गया और वाल्मीकि रामायण के युद्ध काण्ड में वर्णित यह आदित्य हृदयम मंत्र संपन्न होता है ।

Sunday, 21 January 2018

Banking abbreviation meaning

HTTP का अर्थ क्या है?उत्तर:- Hyper Text Transfer Protoco.
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☞. NEFT का मतलब है?उत्तर:- National Electronic Funds Transfer.
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☞. FDI का मतलब है?उत्तर:- Foreign Direct Investment .
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☞. CRR का मतलब है?उत्तर:- Cash Reserve Ratio.
☞. CFRA का मतलब है?उत्तर:- Combined Finance & Revenue Accounts.
☞. GPF का मतलब है?उत्तर:- General Provident Fund.☞. GMT का मतलब है?उत्तर:- Global Mean Time.
☞. GPS का मतलब है?उत्तर:- Global Positioning System
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☞. SEU का मतलब है?उत्तर:- Slightly Enriched Uranium.
☞. GST का मतलब है?उत्तर:- गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (Goods and ServiceTax).
☞. GOOGLE का मतलब है?उत्तर:- Global Organization Of Oriented GroupLanguage Of Earth.
☞. YAHOO का मतलब है?उत्तर:- Yet Another Hierarchical Officious Oracle .
☞. WINDOW का मतलब है?उत्तर:- Wide Interactive Network Development forOffice work Solution .
☞. COMPUTER का मतलब है?उत्तर:- Common Oriented Machine ParticularlyUnited and used under Technical and EducationalResearch.
☞. VIRUS का मतलब है?उत्तर:- Vital Information Resources Under Siege.
☞. UMTS का मतलब है?उत्तर:- Universal Mobile TelecommunicationsSystem.
☞. AMOLED का मतलब है?उत्तर:- Active-matrix organic light-emitting diode
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.☞. IMEIका मतलब है ?उत्तर:- International Mobile EquipmentIdentity.
☞. ESN का मतलब है?उत्तर:- Electronic Serial Number.

राष्ट्रपती देशाचे पाहिले नागरिक , तुमचा नंबर किती ?

राष्ट्रपती देशाचे पहिले नागरिक, तुमचा नंबर कोणता?

देशाच्या १४ व्या राष्ट्रपतिपदी विराजमान झाल्यानंतर रामनाथ कोविंद हे भारताचे पहिले नागरिक बनले. आज देशाचे दुसरे नागरिक अर्थात उपराष्ट्रपतिपदासाठीचं मतदान सुरू आहे. देशाच्या नागरिकत्वाच्या क्रमानुसार सामान्य नागरिकाचा यात नेमका नंबर कितवा? हे पाहू...

तिसरा नागरिक: पंतप्रधान

चौथा नागरिक: राज्यपाल (स्वत:च्या संबंधित राज्यात)

पाचवा नागरिक: देशाचे माजी राष्ट्रपती, पाच ए: देशाचा उप-पंतप्रधान

सहावा नागरिक: देशाचे सरन्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष

सातवा नागरिक: केंद्रीय मंत्रिमंडळातील सदस्य, राज्यांचे मुख्यमंत्री, निती आयोगचे उपाध्यक्ष, माजी पंतप्रधान, राज्यसभा आणि लोकसभेचा विरोधी पक्ष नेता

सात ए: भारतरत्न पुरस्कार विजेता

आठवा नागरिक: भारतातील मान्यताप्राप्त राजदूत, मुख्यमंत्री (स्वत:च्या राज्याबाहेर), राज्यपाल (स्वत:च्या राज्याबाहेर)

नववा नागरिक: सुप्रीम कोर्टाचे न्यायाधीश

नऊ ए: यूपीएससीचे चेअरमन, मुख्य निवडणूक आयुक्त, देशाचा महालेखापरीक्षक

दहावा नागरिक: राज्यसभेचे उपाध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, लोकसभेचे उपसभापती, निती आयोगातील सदस्य, संरक्षण विभागाशी निगडीत इतर मंत्री

११ वा नागरिक: अॅटर्नी जनरल, मंत्रिमंडळ सचिव, उप-राज्यपाल (केंद्रशासित प्रदेशांसह)

१२ वा नागरिक : तिन्ही संरक्षण दलांचे प्रमुख

१३ वा नागरिक: असाधारण राजदूत आणि पूर्णाधिकार प्राप्त मंत्री

१४ वा नागरिक: राज्यांचे चेअरमन आणि राज्य विधानसभेचे सभापती, हायकोर्टाचे मुख्य न्यायाधीश

१५ वा नागरिक: राज्यांचे मंत्रिमंडळ सदस्य, केंद्र शासित राज्यांचे मुख्यमंत्री, दिल्लीचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी, केंद्रातील उपमंत्री

१६ वा नागरिक: लेफ्टनंट जनरल आणि प्रमुख अधिकारी

१७ वा नागरिक: अल्पसंख्याक आयोगाचे अध्यक्ष, अनुसूचित जाती-जमातीच्या राष्ट्रीय आयोगाचे अध्यक्ष, हायकोर्टाचे मुख्य न्यायाधीश (स्वत:च्या राज्याबाहेर)

१८ वा नागरिक: कॅबिनेट मंत्री (स्वत:च्या राज्याबाहेर), राज्यांच्या विधानसभेचे सभापती आणि अध्यक्ष (स्वत:च्या राज्याबाहेर), राज्यांच्या विधानसभेचे उपाध्यक्ष, राज्यांचे मंत्री

१९ वा नागरिक: केंद्रशासित राज्यांचे मुख्य आयुक्त, केंद्रशासित राज्यांचे उपमंत्री, केंद्रशासित प्रदेशांच्या विधानसभेचे उपाध्यक्ष.

२० वा नागरिक: राज्यांच्या विधानसभांचे अध्यक्ष आणि उपाध्यक्ष (स्वत:च्या राज्याबाहेर)

२१ वा नागरिक: खासदार

२२ वा नागरिक: राज्यांचे उपमुख्यमंत्री (स्वत:च्या राज्याबाहेर)

२३ वा नागरिक: लष्कराचे कमांडर, व्हाइसचीफ आणि इतर महत्त्वाचे अधिकारी, राज्य सरकारचे मुख्य सचिव, अल्पसंख्याक आयागोचे आयुक्त, अनुसूचित जाती-जमाती आयोगांचे आयुक्त, अल्पसंख्याक आयोगातील सदस्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जाती आणि राष्ट्रीय अनुसूचित जमाती आयोगाचे सदस्य

२४ वा नागरिक: उप राज्यपालांच्या रँकशी समकक्ष अधिकारी

२५ वा नागरिक: भारत सरकारचे अतिरिक्त सचिव

२६ वा नागरिक: भारत सरकारचे संयुक्त सचिव, मेजर जनरल रँकशी समस्क रँकचे अधिकारी

या सर्वांनंतर देशातील सामान्य व्यक्ती असतो देशाचा २७ वा नागरिक.

शेतकरी अपघात विमा आणि गावचा विकास ग्रामसेवकाचे काम

[1/21, 9:47 PM] ‪+91 99756 74286‬: कृपया जवळील शेतकरी बाधंवाना ही माहीती  सांगावी हि विनंती.

आपल्या गावात दुर्देवाने शेतक-याचा अपघाती मृत्यु झाला तर महाराष्ट्र शासन, कृषि विभागामार्फत "गोपीनाथ मुडें '' शेतकरी अपघात विमा योजना अंर्तगत
200000/- ची मदत केली जाते. त्यासाठी लागणारी कागदपत्राचा तपशील :-

1)  ७ /१२ 
2)  ८  /अ
3)  गावनमुना ६ - ड
4)  गावनमुना ६ - क
5)  तलाठी प्रमाणपत्र (गोल शिक्का)
6)  वयाचा पुरावा
7)  F.I.R.
8)  मृत्यु /अपंगत्वाचा दाखला
9)  घटना स्थळाचा पंचनामा (पोलीस सांक्षाकित)
10) मरणोत्तर पंचनामा (पोलीस सांक्षाकित)
11) पोस्टमार्टम पंचनामा
12)  ड्रायव्हिग लायसन्स (मोटारसायकल अपघात)
13) MSEB Report ( विजेचा शॉक लागुन )
14) पासबुक झेराक्स (क्लेम धारक)
15) रहिवाशी प्रमाणपत्र

अधिक माहितीसाठी आपल्या तालुक्याच्या तालुका कृषी  अधिकारी कार्यालयात संर्पक साधावा.

- श्री दादाजी भुसे
( ग्रामविकास राज्यमंत्री,महाराष्ट्र)

[1/21, 10:39 PM] ‪+91 91724 78080‬: प्रिय संरपंच उपसंरपंच  व ग्रां पं संदस्य.ग्रामस्थ मित्रांनो येत्या 26जानेवारी च्या ग्रांमसभामध्ये ग्रांमसेवकाकडून माहिती मिळवा हिशेब विचारा
1} मुद्रांक शुल्क वार्षि किती जमा झाला आहे
2}रॉयल्टी किती जमा झाली
3} तेरावा वित्त आयोगांचा निधि किती खर्च झाला
4)चौधावा वित्त आयोगांचा निधि किती खर्च झाला
5)पेसा चा निधि किती व जमा खर्च वार्षीक
6)दंलित वस्ती चा निधि वार्षीक जमा खर्च
6}जनसुविधा आंतरगत निधि
7} ठक्कर बाप्पाअंतरगत निधि
8} तेरा ताळेबंध चा हिशोब व वहया
9} कोण कोणत्या बँक मध्ये खाते आहे ते विचारा नाहीत ते म्हाणता 1 किवा 2 परंतू 4ते 5 सरकरी बॅक खाते आसतत
10}आरोग्य विभाग रेशनिगं विभाग हयाचा आढावा मागवा
10) गांवची घरपट्टी व वसुली किती व थकबाकी किती तो हिशोब घ्या
11} कृषी विभागांकडून सर्व हिशोब व कामाचा तपशिल मागवा
11} ग्रांमपंचायती मार्फत किती कामे केली ते विचारा
12}उदाः जेडपीच्या निधी
13} पंचायतसमितीचा निधी
14}आमदार निधी
15}खासदार निधी
16}विधानपरिषेधेचा निधी
17}पालकमंत्री निधी
18}मुख्यमंत्री निधी
19}सार्वजनिक बांधकांम निधी
20}पंतप्रधान विकास निधी
हि सर्व माहिती येत्या 26 जानेवारी च्या ग्रामसभेला विचारा बघा काय
घोळ आहे तो तूमच्या समोर
येईल व गांवच्या ग्रांमपंचायत मध्ये काय चालंय ते कळेल.
गांवच्या विकासासाठी सतर्क रहा.
सर्वानी यावेळी  ग्रामसभेला आवर्जून उपस्थित रहा व हे प्रश्न विचारा .भविष्यात कोकणावर अन्याय होऊ नये वाटत असेल तर जागरूक व्हा ,गावकर्याना जागे करा .
14 व्या वित्त आयोगा अंतर्गत सरपंचाने काय विकास आराखडा बनवला अभ्यास करा .चांगले प्रस्ताव सुचवा .जागरूक गाव   सम्रुद्ध कोकण
अतिशय चांगली माहिती धन्यवाद
*तुमच्या गावासाठी नक्की वाचा*

चौदाव्या वित्त आयोगाद्वारे महाराष्ट्राला १३ हजार ५३२
कोटी रुपये मिळणार आहेत. ही बेसिक ग्रांट असेल. याशिवाय
१५०३ कोटी रुपये परफ़ोर्मन्स ग्रांट असणार आहे. अंदाजे प्रत्येक
*ग्रामपंचायतीला वर्षाला सुमारे 40 ते 50 लाख मिळणे अपेक्षित* आहे हे पैसे याच वर्षात जमा होतील आणि पुढील पाच वर्षे मिळतील. महत्वाचे म्हणजे हे *पैसे डायरेक्ट ग्रामपंचायतींना मिळणार* आहेत. म्हणजे अधेमध्ये कोणीच
असणार नाही. निधीचा विनियोग योग्य पद्धतीने केला तर
पुढच्या वर्षापासून परफ़ोर्मन्स ग्रांट मधून अजून अधिक पैसे
मिळतील. म्हणजे पुढील ५ वर्षे दरवर्षी 40 ते 50 लाख रुपये
मिळतील. याचाच अर्थ *पाच वर्षात ग्रामपंचायतीत सुमारे २ ते ३ कोटी* रुपये मिळतील. हा सर्व निधी खर्च करण्यासाठी कुठल्याही प्रस्तावाची, कुणाच्याही संमतीची गरज नाही.
कुठे कलेक्टर, CEO कडे जायची गरज नाही. जि. प. सदस्य,
पंचायत समिती सदस्य यांच्याही संमतीची गरज नाही.
( थोडेफार प्रशासकीय अपवाद वगळून) फक्त गावकऱ्यांनी
सांगायचे की आम्हाला हे काम करून पाहिजे आहे. बस्स ते काम
ग्रामपंचायतीला करावेच लागेल. पण आपणच आपल्याला काय
हवे हे सांगितले नाही तर ग्रामसेवक आणि पदाधिकारी आणि
contractor त्यांना सोयीस्कर कामे करून आणि त्यांचे पर्सेंट
काढून मोकळे होतील. आता पुढचा प्रश्न आहे की हे कसे
करायचे. आता हा निधी कोणत्या कामांवर खर्च करायचा,
कसा खर्च करायचा यासंबंधी स्वतंत्र GR सरकार लवकरच
काढणार आहे. त्यावर सर्वांनी लक्ष ठेवावे. पण तोपर्यंत माझी
सर्वांना विनंती आहे कि त्यांनी आपल्या गावासाठी काय
काय करायचे आहे अश्या कामांची लिस्ट तयार करून ठेवावी.
अगदी गल्लीनिहाय, शेतनिहाय कामाचे नियोजन करून ठेवावे.
अगदी बारीक सारीक कामांचीही यादी करावी. गल्ली, शेत,
सार्वजनिक जागा अशा सर्वांशी संबंधित कामांची यादी
करावी. हे करत असताना सार्वजनिक कामांवर जास्त भर
असावा. अर्थात व्यक्तिगत लाभार्थी देखील घ्यायला हरकत
नाही.
इतर गावकर्यांशी चर्चा करावी. अशा पद्धतीने
आराखडा तयार झाल्यावर ग्रामपंचायतीला सादर करावा
(त्यात वित्त आयोगाच्या निकषांमध्ये बसणारी कामे लगेच
हातात घेता येतिल.). ग्रामपंचायत पदाधिकारी आणि
अधिकारी यांचे सहकार्य मिळेल याची शाश्वती आहेच. पण
ग्रामपंचायत स्तरावरील अधिकारी (ग्रामसेवक, engineer)
किंवा पदाधिकारी किंवा BDO अशा कोणीही त्याला
काहीही कारण नसताना आडकाठी आणण्याचा प्रयत्न केला
तर आधी प्रेमाने आणि प्रेमानेही नाही ऐकले तर मग थोडे वेगळे
उपाय अवलंबावे लागतील. CEO कडे तक्रार करण्यापासून अँटी
करप्शन कडे जाण्याचीही तयारी ठेवावी लागेल. अर्थात अशी
वेळ येणार नाही *कारण तरुण एकत्र आले तर सर्वांचे सहकार्य*
राहीलच . मुख्य म्हणजे कामे हाती घेतल्यानंतर कामे करणाऱ्या
कंत्राटदारांच्या कामावरही लक्ष ठेवावे लागेल.
पदाधिकारी आणि कंत्राटदारांना विश्वासात घेऊन सांगावे
लागेल कि तुमच्या छोट्यामोठ्या प्रशासकीय "Adjustment"
तुम्ही करा पण काम मात्र योग्यच झाले पाहिजे. कारण एका
कामासाठी एकदा मिळालेली ग्रांट पुन्हा मिळत नाही.
त्यामुळे एकदाच पण चांगले काम झाले पाहिजे. गावातील
अनेक कामे पाहिली तर आपल्याला कळेल कि ग्रांट कश्या
वाया गेल्या आहेत. याबाबतीतही आधी प्रेमाने आणि नाही
ऐकले तर "वेगळ्या" मार्गाने काम करून घ्यावे लागेल. यासाठी
सर्व तरुणांना एकत्र राहावे लागेल आणि "कातडी बचाऊ"
धोरण सोडावे लागेल. या सर्व नियोजनासाठी आणि
ग्रामपंचायत पदाधिकारी आणि अधिकारी यांच्याशी
सविस्तर चर्चा करण्यासाठी सर्वांनी गावाला दोन दिवस
एकत्र मिटिंग करावी लागेल. ताकदीने काम करावे लागेल.
संग्रामसाॅफ्ट प्रणालीवर आपल्याला ONLINE ग्रामपंचायतीचे
जमा खर्च पाहता येतात. चला 14 व्या वित्त आयोगाचे पैसे
वापरुन आपण आपल्या गावाचे भविष्य बदलू. नवभारताचे
निर्माण करु. स्वातंत्र्य सैनिकांनी प्राण दिले..आजही सैनिक
सीमेवर प्राण देत आहेत..मग आपण एवढेही करु नये का..आपल्या
खेड्यापाड्यातील मित्रांना हा मेसेज आणि सोबतचा GR
फॉरवर्ड करा आणि देशाला, महाराष्ट्राला अग्रेसर
बनवा...जयहिंद..जय महाराष्ट्र..
💐 💐 💐 💐 💐 💐 💐 💐
वाचल्याबद्दल धन्यवाद आता यानुसार गावच्या
विकासासाठी हातभार लावावा
GR अलेला आहे कदाचित तुमच्या ग्रामसेवक यांच्याशी चर्चा
करून घ्यावी............................
आराखडा बनविण्याची प्रक्रिया सुरू आहे सहभागी व्हा.... 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

देवा जन्म आता तुझ्या पायावर

माघी गणेश जयंती च्या मनोभावे शुभेच्छा...!!
देवा जन्म आता तुझ्या पायावर
जगण्या आधार नाम तुझे ।।१
सांभाळी  कृपाळा जरी  भटकलो
तमी सापडलो मोहरात्री ।।२
करावी सोबत आणावे शोधत
घालावे पोटात अपराध ।।३
पाही बेडकाची उडी चिखलात
परी सांभाळत तया  तुच ।।४
अन  हत्येवीन जया  नाही  जीणे
घडे  सांभाळणे तया  तुवा ।।५
व्याघ्रादी  केसरी श्वान भूल्लुकासी
हरीण हत्तीसी प्रतिपाळी  ।।६
म्हणून मजला वाटतसे आशा
जरी  घोर निशा सभोवती  ।।७
माझिया चुकांचे करावे क्षालन 
पतित पावन दिगंबरा ।।८
-----विक्रांत प्रभाकर तिकोणे
!! ॐ नमो भगवते श्री स्वामी समर्थाय नम: !!

Saturday, 20 January 2018

घरात अपशब्द बोलू नये

** अपशब्द घरात बोलल्यास,वास्तू तथास्तू म्हणते **

आपण सर्व जणच,कळत न कळत,आपल्या परिवारासोबत राहण्या-या व्यक्तीबरोबर,जीवनांच्या दैनंदिन गरजा पुर्ण करत असताना,एकाद्याला कमी पडते तसेच एकाद्याला कामाचा ञास जास्त होतो.किवा अनेक कारणामुळे घरातील एक दोन सदस्याबरोबर किरकोळ भांडण तंटे होत असतात..त्यावेळी एकमेकांना रागाच्या भरात आपण काहीतरी भयंकर बोलत असतो.आणि आपल्याच कुटुबांतील व्यक्ती बद्दल अहितकारी बोलत असतो.
ते ह्या प्रमाणे--तुझे वाटोळ व्हावे.तुझी नोकरी जावावी.तुला कधीच सुख मिळणार नाही.अन्न अन्न करीत बसशील.तुझ लग्न नाही होणार.हा माझा शाप आहे .तुला मुल मुल म्हटल तरी मुले होणार नाही.वैगेरे वैगेरे

घरात आईवडीलांची भांडणे होत असतात.पति-पत्नीची भांडणे होत असतात.भाऊ बहीणीची भांडणे होत आसतात.बाप लेकांची भांडणे होत असतात.आई-लेकीची भांडणे होत असतात.सासु-सुनेची भांडणे होत असतात.
आपल्या घरातील एकुण सदस्य असतात.त्याच्यामधे कधीतरी भांडणे होत असतात.अशा वेळी सहज न विचार करता.आपण वाईट शब्द वापरत असतो.

आपले घर म्हणजे" वास्तू " हया मधील वास्तूपुरूष तथास्तू म्हणत असतो.म्हणजे "तुझी जी मागणी आहे ती पुर्ण व्हावी."

सारखे सारखे घरात अपशब्द बोलले गेल्याने ,त्याशब्दाचा म्हणजे आपण आपणच वापरलेल्या शब्दाची फळे आपल्याला मिळायला सुरवात होते.घरातील व्यक्ती आजारी पडायला सुरवात होते.घरात अर्थिक सुबध्दता कमी कमी होत जाते..दारिद्र्य येण्यास सुरवात होते.काही जोडप्यां मध्ये काही कमीपणा मूळे मुले होत नाहीत.
हळुहळु समाजातील आपल्याला मिळणारा मानसम्मान कमी कमी होतो.दिवसे दिवसे हलाकिचे दिवस येण्यास सुरवात होते.
आपल्याला हेच समजत नाही असे .एक दोन वर्षात सर्व कसे बदली झाले.?आपला असा समज होतो कि आपल्यावर दैवी कोप झाला आहे आपल्यावरती कोणी करणीबाधा केली कि काय असे असंख्य प्रश्न आपल्या मनात येतात

ह्याचे मुळ कारण आपणच आहोत हे आपणास उमगत नाही.आपण च हे दिवस मागून घेतलेले असतात. आपली वास्तूच प्रसन्न मनाने तुमची मागणी पुरी करीत असते.

जर आपण चांगले वागलो व बोललो असतो.चांगली मागणी केली असती तर आपली आणखी भरभराट झाली असती पण अजाणतेपणे केलेल्या कर्माची वाईट फळे आपणास विनाकारण मिळतात

म्हणून घरात नेहमी शुभ बोला आणि दुस-या बद्दल शुभ चिंतन करा

म्हणून आजपासून निश्चय करा व कोणीही घरात वाईट व अपशब्द बोलू नका रागआवरा शुभ बोला

*🙏🏻 jay jeevan vidhya🙏🏻*

श्रीगुरुदत्त- पहिली माझी ओवी दत्तगुरुच्या पायाशी

अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त
दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा

पहिली माझी ओवी त्या दत्तगुरू च्या पायाशी
सार्थक करीन जन्माचे मी दिगंबराच्या चरणाशी ll

दुसरी माझी ओवी मी गुरुपादुका वंदीन
चराचरी जो व्यापून उरला अनसुयासुत प्रार्थींन ll

तिसरी माझी ओवी मी क्षणभर प्रपंच विसरिन
मीपण सारे जाळून मी सद्गुरुराया पूजिन ll

चौथी माझी ओवी मी गाणगापूरला जाईन
विनम्रभक्तीभावे मी भिक्षा मागून राहीन ll

पाचवी माझी ओवी मी औदुंबराला जाईन
दत्तगुरुचे नाम घेऊनि पारायण मी करिन ll

सहावी माझी ओवी मी नृसिंहवाडी पाहीन
दत्तगुरुची उपासना मी भक्तिभावे करिन ll

सातवी माझी ओवी मी काशीक्षेत्री जाईन
भोजन करिती दत्तप्रभु त्या तीर्थक्षेत्री राहीन ll

आठवी माझी ओवी मी माहुरगडाला जाईन
शयन देव ते करती तेथे दत्तमाऊली वंदीन ll

नववी माझी ओवी मी गिरनार पर्वत चढीन
प्रभू विश्रांती घेती तेथे माळ जपाची ओढीनं ll

दहावी माझी ओवी मी नारायणपुरला जाईन
गुरुवारी अन पौर्णिमेला दर्शन प्रभूंचे घेईन ll