Thursday, 12 April 2018

सुंदरकांड पाठ के फायदे

सबसे पहले बता दु आप को सुन्दरकांड का पाठ कैसे करना चाहिए,जानले सुन्दरकांड में भगवान हनुमान जी की स्थूति है। सुन्दरकांड का पाठ करने में विश्वाश रखे औए जैसे भगवान श्री राम जी के सारे काज सवारे थे उसी तरह हमारे भी सारे कष्ठ हर लेंगे। सुन्दरकांड में 3 श्लोक ,60 दोहे और 526 चौपाइयां है और 60 दोहे मे से 30 दोहे भगवान विष्णु स्वरूप भगवान श्री राम भगवान जी का वर्ण किया गया है, सुंदर शब्द इस कांड में 24 चौपाइयों में आया है। सुंदरकांड का पाठ करने से पहले स्नान कर ले वस्त्र अच्छे से धारण करले अगर आप नहाए नही तो भी हाथ पैर धोके करे और हनुमान जी, श्री राम जी की फ़ोटो या प्रतिमा पे फूल माला चढ़ा कर के आप को दीप जलाना है। भोग में गुड़,चने,लड्डू,लाल फूल आदि से आप को उनका सृंगार करना है अगर नही भी है तो थोड़ा सा भोग जरूर रखना चाहिए। ध्यान रखे दोस्तो पूरी पूजा के दौरान बह्मचर्य का पालन और अच्छी बाते अपनाए और अपने अंदर पवित्र भवना के साथ यह पूजा करे। पाठ शुरु करने से पहले आप को गणेश जी को पूजा करना चाहिए, फिर अपने अपने गुरु जी का ध्यान करना चाहिए। अपने पितरों का ध्यान करना चाहिए,और आखिर में श्री राम जी की वंदना कर के सुन्दरकांड का पाठ की सुरुवात कर दे। अगर बिना राम जी की स्थूति किये बिना हनुमान चालीसा भी करेंगे तो वो सम्पूर्ण नही मानी जाती है। पाठ खत्म हो ने के बाद हनुमान जी की और राम जी की आरती जरूर गाए,आरती और प्रशाद सभी को दे। सुन्दरकांड करने से पहले अच्छे से आव्हान करले। जब सुंदर कांड समाप्त हो जाये तब भगवान को भोग लगा कर आरती करें और उनकी विदाई करे और उसके बाद सुन्दरकांड को लाल कपड़े में श्रद्धा पूर्वक बांध कर मंदिर में रख दे।
अगर आप के पास इतना समय नही पूर्ण रूप से पढ़ने का क्योकि सुन्दरकांड अगर आप विधिवत करेंगे तो 2 से तीन घण्टे का समय लग जाता है। जो पूरा सुन्दरकांड नहीं पढ़ सकते है वो ये 11 चौपाइयों का पाठ रोजाना कर सकते है कैसे करेंगे आये बताते है। गुप्त कचौपाइया है मित्रो ये चौपाई गुप्त मानी जाती है। हर इंसान शान्ति और शुकून चाहता है। ब्रहमचार्य का पालन करना है आप 43 दिन तक सुन्दरकांड का पाठ कर सकते है। अगर पूरा पाठ नही कर पा रहे है तो ये 11 चौपाई भी करे ही फायदा पा सकते है । पूजा के लिए लाल अशन लेले उत्तर की ओर मुख कर ले। पूजा में लाल रंग का फूल जैसे केसरिया ,लड्डू ,चूरमा या कोई भी डॉयफ्रूट रखले प्रशाद के लिए गुड़ चना भी रख सकते है। सबसे पहले सर्व कारी सिद्धि चौलाई अगर आप जीवन मे किसी तरह के प्रॉब्लम से गुजर रहे है। आप चाहते है कि आप को ओरा की प्राप्ति हो, बल बुद्धि की प्राप्ति हो साहस की प्राप्ति हो पराक्रम की प्राप्ति हो आप हर तरफ जिस भी फील्ड में आप चाहे आप को सफलता प्राप्त हो तो सबसे पहला मन्त्र है “अतुलित बल धामा हेम शैलाभदेहमदनुज वनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यमसकल गुण विधानवानराणामधीशं रघुपति प्रिय भकतं वातजातं नमामि।” बोलिये श्री राम चन्द्र जी की जय इस मंत्र इस चौपाई का पाठ करना चाहिए।

ये तो हु बड़ो के लिए सिद्धि मन्त्र है, छात्र के लिए “ॐ गं गणपतये नमः” इस मंत्र के बुद्धि के देवता है गणेश जी उनका मन्त्र जब करे और ( “बुद्धिहीन तनु जान के सुमिरो पवन कुमार,बल बुद्धि विद्या देहु मम हरो क्लेश विकार”। इस मंत्र आप को जप करना चाहिए, जो भी छात्र गणेश जी के बीज मंत्र या फिर दोनों में से कोई एक मन्त्र का जप कर सकते है। हनुमान चालीसा की ये चौपाई नित्यप्रति 1 माला जप करते है। लाल चंदन की माला भगवान के सामने दीप जालाक़े इस मंत्र का जप कर सकते है। निश्चित रूप से परीक्षा में पास होंगे। इसके साथ ही साथ विद्यर्थियों को एक टिप्स भी बता देता हूं, रोज 11 पत्ते तुलसी के मिश्री के साथ पीस करके आप सेवन करे आप देखेंगे कि आप के बुद्धि का कितना विकास होता है। साथ ही साथ जो सब्जेक्ट में आप वीक है उसमें आप इमली के पत्ते या मोर पंख रख सकते है। बहोत ही चमत्कारी उपाय माना जाता है।

आप ने देखा होगा कि जब भी महाभारत का फ़ोटो देखते है।आप देखते होंगे वहा जब रथ पे बैठे हुए कृष्ण और अर्जुन उनके ऊपर जो झंडा है उनके बीच मे हनुमान जी हमेशा दिखये देते है। आज मैं इसका रहस्य बताता हूँ। आप को महाभारत के युद्ध मे अर्जुन ने अपने प्रिय भगवान श्री कृष्ण से कहा की मैं इस युद्ध मे  निश्चित विजय चाहता हूँ। भगवान् श्री कृष्ण ने अपनी द्वाझा में उनको स्थपित करने की आज्ञा दी मतलब विजय पाने के लिए भी हनुमानजी को भी स्थापित करना पड़ा। शास्त्र साक्षी है, अर्जुन को इसी कारण विजय प्राप्ति हुई थी। ये मन्त्र को 43 दिन अगर आप जपते है तो आपको हर कार्य में सफलता प्राप्ति होगी। आप किसी भी मंदिर में जाए लाल आसान और लाल माला लेकर जप करे, “ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्व शत्रु संघराणाम सर्व रोग हराय सर्ववशिकारण रामदूताय स्वाहा” और “ॐ नमो भगवाते हनुमदाख्यात रुद्राय सर्वदृष्ठिजन” ये 2 मन्त्र हैं जो नीचे वाले मन्त्र बताया आप को जो दुष्ट व्यक्ति हैं जिसे आपको दूर करना हैं तो ये मन्त्र का जाप करे और ये शुक्ल पक्ष से प्रारंभ कर के 12 दिन मूंगे की माला पर आप को यह मंत्र 11 माला रोज करना होगा। और जो भी चीजे है जो आप ने रखके पूजा करने में लिए रख था उसे विसर्जन करना होगा।

ब्यवसाय वृद्धि के लिए या अगर आप ब्यवसाय करना चाहते है,तो दक्षिण की ओर मुख कर के हनुमान जी की मूर्ति की 108 परिक्रमा करनी पड़ेगी और इनमें से कोई एक चौपाई जो मैं आप को बताता हूँ। ये चौपाई बोलते बोलते 108 बार परिक्रमा करनी होगी।
1,विश्व हरण पोषण कर जोई।ताकर नाम भारत अस होई।।
2,कवन सो काज कठिन जग माही।जो नही होई तात तुम्ह पाहि।। ये 2 दोनों मन्त्र में से कोई आप को परिक्रमा करते समय होगा,और परिक्रमा पूरी होने के बाद हनुमान जी को चोला चढ़ना है। थोड़े से फूल में एक दो बूंद चमेली का तेल डाल के उनको लगये चांदी का वर्क लगये बेसन के लड्डू आप उनको अर्पित करे । 40 दिन तक आप को रोज इस चौपाई की लाल आसान पे बैठ करके लाल चंदन या मूंगे की माला से आप को जप करना है। अगर हो सके तो मंगलवार का व्रत करे और हर व्रत नही भी करे ऱो शाम को मीठे गुड़ रोटी ,या फल ईत्यादी का सेवन करे।
दोस्तो मेरे एक दोस्त है उनको एक छुटे केस में जेल में कर दिया गया है। वो जेल में है और उनकी पत्नी समझ नही पा रही है कि उनको क्या करना है। जेल से छूटने के लिए अगर कोई इस तरह की मुसीबत आप के ऊपर आ पड़ी हो तो,“हरि मर्कट मर्कट वाम करे परिमुर्चात मुंचत्ति श्रीमखलिकाम” ये मंत्र का आप जप करना है। किसी भी हनुमान जी के मंदिर में जा कर के तांबे का दीपक लेले उसमे अलसी का तेल डाल लें और उस दीपक को जालकर के 108 बार इस मंत्र का जप करे। प्रवाल की माला आती है,कोई भी पूजा शॉप में आप को मिल जाएगी उसकी माला से या रुद्राक्ष की माला से करे औए आप देखेंगे कि कैसे सारे बंधन काट जाते है और उनको आजादी मिल जाती है। लास्ट आप 4,5 मन्त्र और बात देता हूं जो आप को सुख, शांति मंगल शनि ग्रह की क्रूरता को दूर कर सकते है।हनुमाजी की कृपा को प्राप्त करने के लिए शुक्लपक्ष के प्रथम मंगलवार से ये मन्त्रो को कर सकते है।लाल आसान वे बैठे हनुमान जी की ओरतिस्थित मूर्ति के सामने बैठे घी का दीपक जालये और लाल चंदन की माला से या मूंगे की माला से इस मंत्र जाप करे और रोज 11 माला का 40 दिन तक इन मन्त्रो का जप करना होगा।मन्त्र कुछ इस प्रकार,
1- ॐ हूं हूं हनुमतये फट
2- हौम हस्फ्रें ख्फ्रें हस्त्रो हस्खफ्रेम हसौ हनुमतये नमः
3- ॐ पवन नन्दनाय हूं फट
4- ॐ हं हनुमतये रुद्रतमकाय हुं फट
5- ॐ हां सर्वदृष्ठि ग्रह निवर्णाय स्वाहा

साईबाबा के 11 वचन

पहला वचन
जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा अर्थ- साईं बाबा का अधिकांश जीवन शिरडी में बीता, इसलिए कहते हैं कि शिरडी जाने से ही समस्याएं खत्म हो जाती हैं। जो भक्त शिरडी नहीं जा सकते, वे अपने निकट किसी साईं मंदिर भी जा सकते हैं।

दूसरा वचन
चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर अर्थ- साईं बाबा की समाधि की सीढ़ी पर पैर रखते ही भक्तों का मन भक्ति में डूब जाता है और वे सांसारिक दुखों से मुक्ति पा लेते हैं।

तीसरा वचन
त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा
अर्थ- इस वचन में साईं बाबा ने कहा है कि मेरा शरीर नष्ट हो जाएगा, लेकिन जब भी मेरा भक्त मुझे पुकारेगा, मैं दौड़ के आऊंगा और उसकी सहायता करूंगा।

चौथा वचन मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस अर्थ- इस वचन में साईं कहते हैं कि जिसे भी मुझ पर विश्वास है, वह विपरीत परिस्थितियों में भी मेरी समाधि पर आकर शांति का अनुभव करेगा।

पांचवां वचन मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो अर्थ- साईं बाब कहते हैं मैं अपने भक्तों के विश्वास में जीवित हूं। यह बात भक्ति और प्रेम से कोई भी भक्त अनुभव कर सकता है।

छठा वचन
मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए
अर्थ- साईं बाबा कहते हैं जो भी मेरी शरण में आता है, मैं उसकी हर इच्छा पूरी करता हूं।

सातवां वचन
जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का
अर्थ- जो व्यक्ति मुझे जिस रूप में पूजता है, मैं वैस् ही रूप में उसे दर्शन देता हूं।
 
आठवां वचन
भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा
अर्थ- जो भक्त मुझ पर आस्था रखेंगे, उनका हर दायित्व मैं पूरा करुंगा।

 नौवां वचन
आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वो नहीं है दूर
अर्थ- जो भक्त श्रद्धा व विश्वास से मुझे पुकारेगा, उसकी सहायता मैं जरूर करूंगा।

दसवां वचन
मुझमें लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया
अर्थ- जो भक्त मन, वचन और कर्म से मेरा ही ध्यान करता है, मैं उसका हमेशा ऋणी रहता हूं।

ग्यारहवां वचन
धन्य धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य
अर्थ- साईं बाबा कहते हैं कि जो भक्त अनन्य भाव से मेरी भक्ति में लीन हैं ऐसे ही भक्त वास्तव में भक्त हैं।

Tuesday, 10 April 2018

RETURN 18 statement


Subject: RETURN 18 REPORTS OF YOUR BRANCH AS ON 31-03-2018

 

Dear Sir,

 

Return 18 reports of all Branches have been generated and copied in ILINK report server in global/report/rpt/   directory.

 

Branches may login to ILINK report server from a PC which is connected to EPSON FX 2175 or TVSE HD755 dot matrix printer

 

After logging in , come to global/report/rpt/  folder and give the following command to get the files to your local PC.

 

mget   R18*BBBB*.TXT <enter> , where BBBB is your Branch code.

 

This will get the return 18 individual files of your Branch .

 

Then give the following command to get the return 18 summary:

 

get R18*BBBB*.rpt <enter> , where BBBB is your Branch code.

 

This will get the R 18 summary.

 

After getting the files to your local PC, in command prompt, come to the folder where you have downloaded the files and give the following command:

 

    dir   R18*.*  <enter>. This command will display the files of your Branch.

 

Ensure that the printer is switched on , CPI set to 20, FONT set to HSD.

 

Then give the command   TYPE   [filename]  > PRN.

 

This command will print the statement.

 

Print all the downloaded statements one by one .

 

For any further clarification regarding getting the files / printing the same ,  contact your respective ZCC only.

 

Saturday, 7 April 2018

संदेसे आते है हमे तडपाते है l



हो।।हो, हो.

हो।।हो, हो. ...२ 

संदेसे आते है, हमें तड़पाते है

तो चिती आती है, तो पूछे जाती है।

के घर कब आओगे, के घर कब आओगे

लिखो कब आओगे, के तुम बिन ये घर सुना सुना है---२ 

किसी दिवाली ने, किसी मतवाली ने 

हमें ख़त लिखा है, की हमसे पूछा है

किसी के सांसो ने, किसी के धड़कन ने 

किसी के चूड़ी ने, किसी के कंगन ने 

महकती सुबह ने, मचलती समो ने

अकेली रातो ने, अधूरी बातो ने

तरसती बहो ने, और पूछा है तरसी निगाहों ने

के घर कब आओगे, के घर कब आओगे


लिखो कब आओगे, के तुम बिन ये घर सुना सुना है---२ 

संदेसे आते है, हमें तड़पाते है


तो चिती आती है, तो पूछे जाती है।

के घर कब आओगे, के घर कब आओगे

लिखो कब आओगे, के तुम बिन ये घर सुना सुना है

मोहबत वालो ने, हमारे यारो ने


हमें यह लिखा है, की हमसे पूछा है


हमारे गाओं ने, आम के छावो ने


पुराने पिपल ने, बरसते बदल ने 


खेत खलिहानों ने, हरे मैदानों ने


बसंती बेलो ने, घूमति बेलो ने 


चहकती कलियों ने, और पूछा है गाँव के गलियों ने

के घर कब आओगे, के घर कब आओगे


लिखो कब आओगे, के तुम बिन ये घर सुना सुना है---२ 

संदेसे आते है, हमें तड़पाते है

तो चिती आती है, तो पूछे जाती है।

के घर कब आओगे, के घर कब आओगे

लिखो कब आओगे, के तुम बिन ये घर सुना सुना है

हो।हो।हॊओ 

कभी एक ममता की, प्यार के गंगा के,


ओ चिट्टी आती है, साथ ओ लती है


मेरे दिन बचपन के, खेल वोह आँगन के 


वोह साया आँचल का, ओ टिका काजल का


वोह लोरी रातो में, वो नरमी बातो में


वो चाहत आँखों में, ओ चिंता बातो में


बिगड़ना ऊपर से, मुहब्बत अन्दर से 


करे वोह देवी माँ, यही हर ख़त में पूछे मेरी माँ,

के घर कब आओगे, के घर कब आओगे


लिखो कब आओगे, के तुम बिन ये घर सुना सुना है---२ 

संदेसे आते है, हमें तड़पाते है

तो चिती आती है, तो पूछे जाती है।

के घर कब आओगे, के घर कब आओगे

लिखो कब आओगे, के तुम बिन ये घर सुना सुना है-२ 

हो…।हो……………… 

ये गुजरने वाली हवा बता, मेरा इतना काम करेगी क्या
मेरे गाँव जा मेरे दोस्तों मो सलाम दे,


मेरे गाँव में है जो वोह गली, जहा रहती है मेरी दिलरुबा


उसे मेरे प्यार का जाम दे--२ 


वही थोड़ी दूर है घर मेराम मेरे घर में है मेरी बुदि माँ, 


मेरे माँ के पैरो को छूके तू , उसे उसके बेटे का नाम दे


ये गुजरने वाली हवा,जरा  मेरे दोस्तों, मेरी दिल्रुब्बा 


मेरे माँ को मेरा पयाम दे, उन्हें जाके तुम ये पयाम दे

 मै वापस आऊंगा , मै वापस आऊंगा  


फिर अपने गाओ में , उसीकी छाओं में 


के माँ के आचल से, किया जो वडा था ओ निभाऊंगा


मई एक दिन आऊंगा--८


Sunday, 1 April 2018

मारुतीकवच

*जीवन में सम्पूर्ण सुरक्षा के लिए हनुमत कवच का पाठ करें*

दुर्गा कवच की तरह हनुमत कवच भी प्रतिदिन जपने से मनुष्य सुखी व निर्भय बना रहता है। स्वयं भगवान राम के रावण से युद्ध करते समय हनुमत कवच का पाठ किया था। यह कवच एक मुखी और पांच मुखी हनुमान से प्रार्थना के रुप में हैं। भगवान राम द्वारा पढ़े गए हनुमत कवच का भावार्थ इस प्रकार है। मनुष्य को सुवह शाम इस कवच का पाठ करना चाहिए जिससे वह भयमुक्त बना रहें। आजकल जिस संख्या में दुर्घटनाएं हो रही हैं। उसको देखते हुए हर मनुष्य को हनुमत कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए। यह कवच भगवान राम द्वारा रचा गया है जो इस प्रकार है :

*हनुमत कवच*

हनुमान पूर्वत: पातु दक्षिणे पवनात्मज:।
पातु प्रतीच्यां रक्षोघ्न: पातु सागरपारग:॥1॥

उदीच्यामर्ूध्वत: पातु केसरीप्रियनन्दन:।
अधस्ताद् विष्णुभक्तस्तु पातु मध्यं च पावनि:॥2॥

लङ्काविदाहक: पातु सर्वापद्भ्यो निरन्तरम्।
सुग्रीवसचिव: पातु मस्तकं वायुनन्दन:॥3॥

भालं पातु महावीरो भु्रवोर्मध्ये निरन्तरम्।
नेत्रे छायापहारी च पातु न: प्लवगेश्वर:॥4॥

कपोलौ कर्णमूले तु पातु श्रीरामकिङ्कर:।
नासाग्रमञ्जनीसूनु पातु वक्त्रं हरीश्वर:।
वाचं रुद्रप्रिय: पातु जिह्वां पिङ्गललोचन:॥5॥

पातु देव: फालगुनेष्टश्चिबुकं दैत्यदर्पहा।
पातु कण्ठं च दैत्यारि: स्कन्धौ पातु सुरार्चित:॥6॥

भुजौ पातु महातेजा: करौ च चरणायुध:।
नखान्नखायुध: पातु कुक्षिं पातु कपीश्वर:॥7॥

वक्षो मुद्रापहारी च पातु पार्श्वे भुजायुध:।
लङ्काविभञ्जन: पातु पृष्ठदेशं निरन्तरम्॥8॥

नाभिं च रामदूतस्तु कटिं पात्वनिलात्मज:।
गुह्यं पातु महाप्राज्ञो लिङ्गं पातु शिवप्रिय:॥9॥

ऊरू च जानुनी पातु लङ्काप्रासादभञ्जन:।
जङ्घे पातु कपिश्रेष्ठो गुल्फौ पातु महाबल:।
अचलोद्धारक: पातु पादौ भास्करसन्निभ:॥10॥

अङ्गानयमितसत्त्वाढय: पातु पादाङ्गुलीस्तािा।
सव्रङ्गानि महाशूर: पातु रोमाणि चात्मवित्॥11॥

हनुमत्कवचं यस्तु पठेद् विद्वान् विचक्षण:।
स एव पुरुषश्रेष्ठो भुक्तिं च विन्दति॥12॥

त्रिकालमेककालं वा पठेन्मासत्रयं  नर:।
सर्वानृरिपून् क्षणााित्वा स पुमान् श्रियमाप्नुयात्॥13॥

मध्यरात्रे जले स्थित्वा सप्तवारं पठेद्यदि।
क्षयाऽपस्मार-कुष्ठादितापत्रय-निवारणम्॥14॥

अश्वत्थमूलेऽर्क वारे स्थित्वा पठति य: पुमान्।
अचलां श्रियमाप्नोति संग्रामे विजयं तथा॥15॥

बुद्धिर्बलं यशो धैर्य निर्भयत्वमरोगताम्।
सुदाढणर्यं वाक्स्फुरत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत्॥16॥

मारणं वैरिणां सद्य: शरणं सर्वसम्पदाम्।
शोकस्य हरणे दक्षं वंदे तं रणदारुणम्॥17॥

लिखित्वा पूजयेद्यस्तु सर्वत्र विजयी भवेत्।
य: करे धारयेन्नित्यं स पुमान् श्रियमाप्नुयात्॥18॥

स्थित्वा तु बन्धने यस्तु जपं कारयति द्विजै:।
तत्क्षणान्मुक्तिमाप्नोति निगडात्तु तथेव च॥19॥

‘‘ हे हनुमान जी पूर्व दिशा में पवनात्मज, दक्षिण दिशा में राक्षसों के विनाशक तथा समुद्र लांघनेवाला रक्षा करें। उत्तर दिशा में उध्र्व गमनशील केसरी प्रिय नंदन तथा नीचे विष्णु भक्त तथा मध्य में पावनि पवन पुत्र जी रक्षा करें। सीता शोक विनाशक अवांतर दिशाओं में तथा लंका विदारक समस्त आपत्तियों से निरंतर रक्षा करें। सुग्रीव सचिव मस्तक, वायु नंदन भाल तथा दोनों भौवों के मध्य भाग की महावीर जी रक्षा करें। दोनों नेत्रों की छाया पहारी तथा कपोलों की रक्षा प्लवगेश्वर तथा कर्ण मूल की श्री राम किंकरजी रक्षा करें। नासिका के अग्रभाग की रक्षा अंजनी सुत तथा वाणी की रुद्रप्रिय और जिह्ना की रक्षा पिंगल लोचन करें। दांतों की रक्षा फाल्गुणेष्ठ एवं दाढी के नीचे भाग की रक्षा दैत्य प्राणहर्ता तथा कंठ की दैत्यारि वे दोनों स्कंधों की श्री सुरपुजित रक्षा करें। महातेजस्वी दोनों भुजाओं व दोनों हाथों की रक्षा चरणायुध एवं नखों की रक्षा श्री नखायुध तथा कोख की रक्षा श्री कपीश्वर जी करें। मुद्रापहारी वक्षस्थल की तथा वक्षस्थल के आसपास भुजायुध जी रक्षा करें। लंका विनाश करने वाले श्री हनुमान जी सर्वदा पृष्ठ देश की रक्षा करें। श्री रामदूत नाभि की एवं अनिलात्मज कटि की माहाप्राज्ञ गुहयांगों की जंघाओं की रक्षा शिव प्रिय करें। जांघों के नीचे वाने भाग की रक्षा लंका प्रसाद भंजन करें। महाबाहु जंघाओं एवं घुटनों की रक्षा महाबली करें। चरणों की रक्षा भी पहाड उठाने वाले सूर्य के समान तेजस्वी करें तथा समस्त उंगलियों की रक्षा सर्व सत्वादय करें। समस्त अंगों की रक्षा महावीर जी करें।

पाशुपतास्त्र स्तोत्र

पाशुपतास्त्र स्त्राोत का 21 दिन नियमित सुबह-शाम 21-21 पाठ प्रतिदिन करें। साथ ही नीचे लिखे स्तोत्र का एक सौ आठ बार अवश्य जाप करें और सुबह या शाम को इस मंत्र की 51 आहुतियां काले तिल से हवन अवश्य करें।

इस पाशुपत स्तोत्र का मात्र एक बार जप करने पर ही मनुष्य समस्त विघ्नों का नाश कर सकता है ।

सौ बार जप करने पर समस्त उत्पातो को नष्ट कर सकता है तथा युद्ध आदि में विजय प्राप्त के सकता है ।

इस मंत्र का घी और गुग्गल से हवं करने से मनुष्य असाध्य कार्यो को पूर्ण कर सकता है ।

इस पाशुपातास्त्र मंत्र के पाठ मात्र से समस्त क्लेशो की शांति हो जाती है ।

स्तोत्रम

ॐ नमो भगवते महापाशुपतायातुलबलवीर्यपराक्रमाय त्रिपन्चनयनाय नानारुपाय नानाप्रहरणोद्यताय सर्वांगडरक्ताय भिन्नांजनचयप्रख्याय श्मशान वेतालप्रियाय सर्वविघ्ननिकृन्तन रताय सर्वसिध्दिप्रदाय भक्तानुकम्पिने असंख्यवक्त्रभुजपादाय तस्मिन् सिध्दाय वेतालवित्रासिने शाकिनीक्षोभ जनकाय व्याधिनिग्रहकारिणे पापभन्जनाय सूर्यसोमाग्नित्राय विष्णु कवचाय खडगवज्रहस्ताय यमदण्डवरुणपाशाय रूद्रशूलाय ज्वलज्जिह्राय सर्वरोगविद्रावणाय ग्रहनिग्रहकारिणे दुष्टनागक्षय कारिणे ।

ॐ कृष्णपिंग्डलाय फट । हूंकारास्त्राय फट । वज्र हस्ताय फट । शक्तये फट । दण्डाय फट । यमाय फट । खडगाय फट । नैऋताय फट । वरुणाय फट । वज्राय फट । पाशाय फट । ध्वजाय फट । अंकुशाय फट । गदायै फट । कुबेराय फट । त्रिशूलाय फट । मुदगराय फट । चक्राय फट । पद्माय फट । नागास्त्राय फट । ईशानाय फट । खेटकास्त्राय फट । मुण्डाय फट । मुण्डास्त्राय फट । काड्कालास्त्राय फट । पिच्छिकास्त्राय फट । क्षुरिकास्त्राय फट । ब्रह्मास्त्राय फट । शक्त्यस्त्राय फट । गणास्त्राय फट । सिध्दास्त्राय फट । पिलिपिच्छास्त्राय फट । गंधर्वास्त्राय फट । पूर्वास्त्रायै फट । दक्षिणास्त्राय फट । वामास्त्राय फट । पश्चिमास्त्राय फट । मंत्रास्त्राय फट । शाकिन्यास्त्राय फट । योगिन्यस्त्राय फट । दण्डास्त्राय फट । महादण्डास्त्राय फट । नमोअस्त्राय फट । शिवास्त्राय फट । ईशानास्त्राय फट । पुरुषास्त्राय फट । अघोरास्त्राय फट । सद्योजातास्त्राय फट । हृदयास्त्राय फट । महास्त्राय फट । गरुडास्त्राय फट । राक्षसास्त्राय फट । दानवास्त्राय फट । क्षौ नरसिन्हास्त्राय फट । त्वष्ट्रास्त्राय फट । सर्वास्त्राय फट । नः फट । वः फट । पः फट । फः फट । मः फट । श्रीः फट । पेः फट । भूः फट । भुवः फट । स्वः फट । महः फट । जनः फट । तपः फट । सत्यं फट । सर्वलोक फट । सर्वपाताल फट । सर्वतत्व फट । सर्वप्राण फट । सर्वनाड़ी फट । सर्वकारण फट । सर्वदेव फट । ह्रीं फट । श्रीं फट । डूं फट । स्त्रुं फट । स्वां फट । लां फट । वैराग्याय फट । मायास्त्राय फट । कामास्त्राय फट । क्षेत्रपालास्त्राय फट । हुंकरास्त्राय फट । भास्करास्त्राय फट । चंद्रास्त्राय फट । विघ्नेश्वरास्त्राय फट । गौः गां फट । स्त्रों स्त्रौं फट । हौं हों फट । भ्रामय भ्रामय फट । संतापय संतापय फट । छादय छादय फट । उन्मूलय उन्मूलय फट । त्रासय त्रासय फट । संजीवय संजीवय फट । विद्रावय विद्रावय फट । सर्वदुरितं नाशय नाशय फट ।