Sunday, 27 August 2017

गणेश चालीसा

Ganesh Chalisa | श्री गणेश चालीसा June 3, 2017 Admin Ganesh Chalisa (श्री गणेश चालीसा) in Hindi ।।दोहा।। जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल । विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ।।  ।।चौपाई।। जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभः काजू ।। जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायका बुद्धि विधाता ।। वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ।। राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ।। पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ।। सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ।। धनि शिव सुवन षडानन भ्राता । गौरी लालन विश्व-विख्याता ।। ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे । मुषक वाहन सोहत द्वारे ।। कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी । अति शुची पावन मंगलकारी ।। एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ।।  भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ।। अतिथि जानी के गौरी सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ।। अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ।। मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला । बिना गर्भ धारण यहि काला ।। गणनायक गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम रूप भगवाना ।। अस कही अन्तर्धान रूप हवै । पालना पर बालक स्वरूप हवै ।। बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना । लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ।। सकल मगन, सुखमंगल गावहिं । नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ।। शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं । सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ।। लखि अति आनन्द मंगल साजा । देखन भी आये शनि राजा ।। निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक, देखन चाहत नाहीं ।। गिरिजा कछु मन भेद बढायो । उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ।। कहत लगे शनि, मन सकुचाई । का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ।। नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ । शनि सों बालक देखन कहयऊ ।। पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा । बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ।। गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी । सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ।। हाहाकार मच्यौ कैलाशा । शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ।। तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो । काटी चक्र सो गज सिर लाये ।। बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ।। नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ।। बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ।। चले षडानन, भरमि भुलाई । रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ।। चरण मातु-पितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ।। धनि गणेश कही शिव हिये हरषे । नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ।। तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहसमुख सके न गाई ।। मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ।। भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ।। अब प्रभु दया दीना पर कीजै । अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ।। ।।दोहा।। श्री गणेशा यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान । नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान ।। सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश । पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश ।। Ganesh Chalisa in English

Sunday, 20 August 2017

Na mandir jaate hai

न मंदिर जाते हैं, न मदीना जाते है।
हम बैंकर बैंक के सिवा कहीं नहीं जाते हैं ।
न डिस्को में जाते हैं हम, न डेट पर जाते हैं,
हम बैंकर हैं, अक़सर घर देर से जाते है।
न खाकी पे एतबार है , न खद्दर पे इतना भरोसा करते हैं
हम बैंकर हैं, लोग हमारे पर कितना भरोसा करते है।
हिन्दू भी खड़ा रहता है, मुस्लिम भी खड़ा रहता है।
ये बैंकर का दिल है,
इंसानियत भीतर रहती है, मज़हब बाहर खड़ा रहता है !

Friday, 18 August 2017

मेरे राष्के कमर तू ने पहली नजर

Indrajeet Bhardwaj मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क सी गिर गयी काम ही कर गयी आग ऐसी लगायी मज़ा आ गया जाम में घौल कर हुस्न की मस्तियाँ चांदनी मुस्कुराई मज़ा आ गया चाँद के साए में ऐ मेरे साकिया तू ने ऐसी पिलाई मज़ा आ गया नशा शीशे में अंगड़ाई लेने लगा बज़्म रिन्दान में सागर खनकने लगा मैकदे पे बरसने लगी मस्तियाँ जब घटा गिर के छाई मज़ा आ गया वो बे हिजबाना वो सामने आ गए और जवानी जवानी से टकरा गयी और जवानी जवानी से टकरा गयी आँख उनकी लड़ी यूँ मेरी आँख से आँख उनकी लड़ी यूँ मेरी आँख से देख कर ये लड़ाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया आँख में ठी हया हर मुलाक़ात पर सुर्ख आरिज़ हुए वसल की बात पर सुर्ख आरिज़ हुए वसल की बात पर उसने शर्मा के मेरे सवालात पे उसने शर्मा के मेरे सवालात पे ऐसे गर्दन झुकाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क सी गिर गयी काम ही कर गयी आग ऐसी लगायी मज़ा आ गया जाम में घौल कर हुस्न की मस्तियाँ चांदनी मुस्कुराई मज़ा आ गया शिख साहिब का ईमान बिक ही गया देख कर हुस-ए-साक़ी पिघल ही गया आज से पहले ये कितने मगरुर थे लुट गयी परसाई मज़ा आ गया ऐ फ़ना शुकर है आज बाद-ए-फ़ना उसने रख ले मेरे प्यार की आबरू अपने हाथों से उसने मेरी क़बर पर चादर-ए-गुल चढ़ाई मज़ा आ गया मेरे रश्के क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया Like · Reply · Mark as spam · 26

Monday, 14 August 2017

कृष्णचा पाळणा

बाळा जो जो रे कुळभूषणा । श्रीनंदनंदना । निद्रा करि बाळा मनमोहना । परमानंदा कृष्णा ॥धृ॥ जन्मुनि मथुरेत यदुकुळी । आलासी वनमाळी । पाळणा लांबविला गोकुळी । धन्य केले गौळी ॥१॥ बंदिशाळेत अवतरुनी । द्वारे मोकलुनी । जनकशृंखला तोडुनी । यमुना दुभंगोनी ॥२॥ मार्गी नेतांना श्रीकृष्णा । मेघनिवारणा । शेष धावला तत्क्षणा । उंचावूणी फणा ॥३॥ रत्‍नजडित पालख । झळके आमोलिक । वरती पहुडले कुलतिलक । वैकुंठनायक ॥४॥ हालवी यशोदा सुंदरी । धरुनी ज्ञानदोरी । पुष्पे वर्षिली सुरवरी । गर्जति जयजयकारी ॥५॥ विश्‍वव्यापका यदुराया । निद्रा करी बा सखया । तुजवरि कुरवंडी करुनिया । सांडिन मी निज काया ॥६॥ गर्ग येऊनी सत्वर । सांगे जन्मांतर । कृष्ण परब्रह्म साचार । आठवा अवतार ॥७॥ विश्‍वव्यापी हा बालक । दृष्ट दैत्यांतक । प्रेमळ भक्तांचा पालक । श्रीलक्ष्मीनायक ॥८॥ विष पाजाया पूतना । येता घेईल प्राणा । शकटासुरासी उताणा । पाडिल लाथे जाणा ॥९॥ उखळाला बांधता मातेने । रांगता श्रीकृष्ण । यमलार्जुनांचे उद्धरण । दावानव प्राशन ॥१०॥ गोधन राखिता अवलिळा । कालिया मर्दीला । दावानल वन्ही प्राशील । दैत्यध्वंस करी ॥११॥ इंद्र कोपता धांवून । उपटील गोवर्धन । गाईगोपाळा रक्षून । करीन भोजन ॥१२॥ कालींदीतीरी जगदीश । व्रजवनितांशी रास । खेळुनि मारील कंसास । मुष्टिक चाणुरास ॥१३॥ ऎशी चरित्रे अपार । दावील भूमीवर । पांडव रक्षील सत्वर । ब्रह्मानंदी स्थिर ॥१४॥ Translation - भाषांतर

Sunday, 13 August 2017

श्रीकृष्ण के पूजा मंत्र

भगवान श्री कृष्ण के मंत्र (Lord Krishna Mantra in Hindi): आप इन मंत्रों को पीडीएफ में डाउनलोड (PDF Download), जेपीजी रूप में (Image Save) या प्रिंट (Print) भी कर सकते हैं। इन मंत्रों को सेव करने के लिए ऊपर दिए गए बटन पर क्लिक करें। भगवान श्री कृष्ण की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें नारियल फल समर्पण करना चाहिए- इदं फ़लं मया देव स्थापित पुर-तस्तव | तेन मे सफ़लानत्ति भरवेजन्मनि जन्मनि || Bhagvan Shri Krishna ki pooja ke dauran is mantra ko padhte huye unhe Naariyal Fal samarpan karna chahiye- Idam Falam Mayaa Dev Sthapit Pur-Tastav | Ten Me Safalaanitti Bharavejanmani Janmani || ****************************************************************** इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान श्री कृष्ण को पान-बीड़ा समर्पण करना चाहिए- ॐ पूंगीफ़लं महादिव्यं नागवल्ली दलैर्युतम् | एला-चूर्णादि संयुक्तं ताम्बुलं प्रतिगृहयन्ताम् || Is mantra ko padhte huye Bhagvan Shri Krishna ko Paan-Beeda samarpan karna chahiye- Om Poongifalam Mahadivyam Naagvallee Dalairyutam | Elaa-Choornaadi Sanyuktam Taambulam Pratigrihayantaam || ********************************************************************** इस मंत्र को पढ़ते हुए बाल गोपाल भगवान श्री कृष्ण को चन्दन अर्पण करना चाहिए- ॐ श्रीखण्ड-चन्दनं दिव्यं गंधाढ़्यं सुमनोहरम् | विलेपन श्री कृष्ण चन्दनं प्रतिगृहयन्ताम् || Is mantra ko padhte huye Baal Gopal Bhagvan Shri Krishna ko Chandan arpan karna chahiye- Om Shrikhand-Chandanam Divyam Gandhadhyam Sumanoharam | Vilepan Shri Krishna Chandanam Pratigrihayantaam || ********************************************************************** श्री कृष्ण की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें सुगन्धित धूप अर्पण करना चाहिए- वनस्पति रसोद भूतो गन्धाढ़्यो गन्ध उत्तमः | आघ्रेयः सर्व देवानां धूपोढ़्यं प्रतिगृहयन्ताम् || Shri Krishna ki pooja karte samay is mantra ko padhte huye unhe sugandhit dhup arpan karna chahiye- Vanaspati Rasod Bhooto Gandhaadhyo Gandh Uttamah | Aaghreyah Sarv Devaanaam Dhoopodhyam Pratigrihayantaam || ************************************************************************* इस मंत्र के द्वारा नंदलाल भगवान श्री कृष्ण को यज्ञोपवीत समर्पण करना चाहिए- नव-भिस्तन्तु-भिर्यक्तं त्रिगुणं देवता मयम् | उपवीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः || Is mantra ke dwara Nandlaal Bhagvan Shri Krishna ko yagyopaveet samarpan karna chahiye- Nav-Bhistantu-Bhiryaktam Trigunam Mayam | Upveetam Maya Dattam Grihaan Parmeshwarah || ******************************************************************** भगवान देवकी नंदन की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए श्री कृष्ण जी को वस्त्र समर्पण करना चाहिए- शति-वातोष्ण-सन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परम् | देहा-लंकारणं वस्त्रमतः शान्ति प्रयच्छ में || Bhagvan Devki Nandan ki pooja ke dauran is mantra ko padhte huye Shri Krishna Ji ko vastra samarpan karna chahiye- Shati-Vaatoshn-Santraanam Lajjaaya Rakshanam Param | Deha-Lankaaranam Vastramatah Shanty Prayachchha Men || ****************************************************************************** श्री कृष्ण पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए बाल गोपाल को शहद स्नान करना चाहिए- पुष्प रेणु समुद-भूतं सुस्वाद मधुरं मधु || तेज-पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृहयन्ताम् || Shri Krishna pooja ke dauran is mantra ko padhte huye Baal Gopal ko shahad snaan karana chahiye- Pushp Renu Samud-Bhutam Suswaad Madhuram Madhu | Tej-Pushtikaram Divyam Snaanartham Pratigrihayantaam || ************************************************************************** भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते समय इस मंत्र के द्वारा उन्हें अर्घ्य समर्पण करना चाहिए- ॐ पालनकर्ता नमस्ते-स्तु गृहाण करूणाकरः || अर्घ्य च फ़लं संयुक्तं गन्धमाल्या-क्षतैयुतम् || Bhagvan Shri Krishna ki pooja karte samay is mantra ke dwara unhe arghya samarpan karna chahiye- Om Paalankartaa Namaste-Stu Grihaan Karunaakarah | Arghya Ch Falam Sanyuktam Gandhmaalya-Kshataiyutam || ********************************************************************************* भगवान श्री कृष्ण के पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें आसन समर्पण करना चाहिए- ॐ विचित्र रत्न-खचितं दिव्या-स्तरण-सन्युक्तम् | स्वर्ण-सिन्हासन चारू गृहिश्व भगवन् कृष्ण पूजितः || Bhagvan Shri Krishna ke pooja ke dauran is mantra ko padhte huye unhe aasan samarpan karna chahiye- Om Vichitra Ratna-Khanchitam Divya-Staran-Sanyuktam | Swarn-Singhasan Chaaru Grihishch Bhagvan Krishna Poojitah || **************************************************************************** इस मंत्र के द्वारा भगवान श्री कृष्ण का आवाहन करना चाहिए- ॐ सहस्त्र शीर्षाः पुरुषः सहस्त्राक्षः सहस्त्र-पातस-भूमिग्वं सव्वेत-सत्पुत्वायतिष्ठ दर्शागुलाम् | आगच्छ श्री कृष्ण देवः स्थाने-चात्र सिथरो भव || Is mantra ke dwara Bhagvan Shri Krishna ka aavahan karna chahiye- Om Sahastra Sheershah Purushah Sahastrakshah Sahastra-Paatas-Bhumigvam Savvet-Satputvaayatishth Darshaagulam | Aagachchha Shri Krishna Devah Sthaane-Chaatra Sitharo Bhav || इन्हें भी पढ़ेंः-

भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम

भगवान कृष्ण के 108 नाम (108 Names of Lord Krishna in Hindi) 1 अचला : भगवान। 2 अच्युत : अचूक प्रभु, या जिसने कभी भूल ना की हो। 3 अद्भुतह : अद्भुत प्रभु। 4 आदिदेव : देवताओं के स्वामी। 5 अदित्या : देवी अदिति के पुत्र। 6 अजंमा : जिनकी शक्ति असीम और अनंत हो। 7 अजया : जीवन और मृत्यु के विजेता। 8 अक्षरा : अविनाशी प्रभु। 9 अम्रुत : अमृत जैसा स्वरूप वाले। 10 अनादिह : सर्वप्रथम हैं जो। 11 आनंद सागर : कृपा करने वाले 12 अनंता : अंतहीन देव 13 अनंतजित : हमेशा विजयी होने वाले। 14 अनया : जिनका कोई स्वामी न हो। 15 अनिरुध्दा : जिनका अवरोध न किया जा सके। 16 अपराजीत : जिन्हें हराया न जा सके। 17 अव्युक्ता : माणभ की तरह स्पष्ट। 18 बालगोपाल : भगवान कृष्ण का बाल रूप। 19 बलि : सर्व शक्तिमान। 20 चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले प्रभु। 21 दानवेंद्रो : वरदान देने वाले। 22 दयालु : करुणा के भंडार। 23 दयानिधि : सब पर दया करने वाले। 24 देवाधिदेव : देवों के देव 25 देवकीनंदन : देवकी के लाल (पुत्र)। 26 देवेश : ईश्वरों के भी ईश्वर 27 धर्माध्यक्ष : धर्म के स्वामी 28 द्वारकाधीश : द्वारका के अधिपति। 29 गोपाल : ग्वालों के साथ खेलने वाले। 30 गोपालप्रिया : ग्वालों के प्रिय 31 गोविंदा : गाय, प्रकृति, भूमि को चाहने वाले। 32 ज्ञानेश्वर : ज्ञान के भगवान 33 हरि : प्रकृति के देवता। 34 हिरंयगर्भा : सबसे शक्तिशाली प्रजापति। 35 ऋषिकेश : सभी इंद्रियों के दाता। 36 जगद्गुरु : ब्रह्मांड के गुरु 37 जगदिशा : सभी के रक्षक 38 जगन्नाथ : ब्रह्मांड के ईश्वर। 39 जनार्धना : सभी को वरदान देने वाले। 40 जयंतह : सभी दुश्मनों को पराजित करने वाले। 41 ज्योतिरादित्या : जिनमें सूर्य की चमक है। 42 कमलनाथ : देवी लक्ष्मी की प्रभु 43 कमलनयन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं। 44 कामसांतक : कंस का वध करने वाले। 45 कंजलोचन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं। 46 केशव : 47 कृष्ण : सांवले रंग वाले। 48 लक्ष्मीकांत : देवी लक्ष्मी की प्रभु। 49 लोकाध्यक्ष : तीनों लोक के स्वामी। 50 मदन : प्रेम के प्रतीक। 51 माधव : ज्ञान के भंडार। 52 मधुसूदन : मधु- दानवों का वध करने वाले। 53 महेंद्र : इन्द्र के स्वामी। 54 मनमोहन : सबका मन मोह लेने वाले। 55 मनोहर : बहुत ही सुंदर रूप रंग वाले प्रभु। 56 मयूर : मुकुट पर मोर- पंख धारण करने वाले भगवान। 57 मोहन : सभी को आकर्षित करने वाले। 58 मुरली : बांसुरी बजाने वाले प्रभु। 59 मुरलीधर : मुरली धारण करने वाले। 60 मुरलीमनोहर : मुरली बजाकर मोहने वाले। 61 नंद्गोपाल : नंद बाबा के पुत्र। 62 नारायन : सबको शरण में लेने वाले। 63 निरंजन : सर्वोत्तम। 64 निर्गुण : जिनमें कोई अवगुण नहीं। 65 पद्महस्ता : जिनके कमल की तरह हाथ हैं। 66 पद्मनाभ : जिनकी कमल के आकार की नाभि हो। 67 परब्रह्मन : परम सत्य। 68 परमात्मा : सभी प्राणियों के प्रभु। 69 परमपुरुष : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले। 70 पार्थसार्थी : अर्जुन के सारथी। 71 प्रजापती : सभी प्राणियों के नाथ। 72 पुंण्य : निर्मल व्यक्तित्व। 73 पुर्शोत्तम : उत्तम पुरुष। 74 रविलोचन : सूर्य जिनका नेत्र है। 75 सहस्राकाश : हजार आंख वाले प्रभु। 76 सहस्रजित : हजारों को जीतने वाले। 77 सहस्रपात : जिनके हजारों पैर हों। 78 साक्षी : समस्त देवों के गवाह। 79 सनातन : जिनका कभी अंत न हो। 80 सर्वजन : सब- कुछ जानने वाले। 81 सर्वपालक : सभी का पालन करने वाले। 82 सर्वेश्वर : समस्त देवों से ऊंचे। 83 सत्यवचन : सत्य कहने वाले। 84 सत्यव्त : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देव। 85 शंतह : शांत भाव वाले। 86 श्रेष्ट : महान। 87 श्रीकांत : अद्भुत सौंदर्य के स्वामी। 88 श्याम : जिनका रंग सांवला हो। 89 श्यामसुंदर : सांवले रंग में भी सुंदर दिखने वाले। 90 सुदर्शन : रूपवान। 91 सुमेध : सर्वज्ञानी। 92 सुरेशम : सभी जीव- जंतुओं के देव। 93 स्वर्गपति : स्वर्ग के राजा। 94 त्रिविक्रमा : तीनों लोकों के विजेता 95 उपेंद्र : इन्द्र के भाई। 96 वैकुंठनाथ : स्वर्ग के रहने वाले। 97 वर्धमानह : जिनका कोई आकार न हो। 98 वासुदेव : सभी जगह विद्यमान रहने वाले। 99 विष्णु : भगवान विष्णु के स्वरूप। 100 विश्वदक्शिनह : निपुण और कुशल। 101 विश्वकर्मा : ब्रह्मांड के निर्माता 102 विश्वमूर्ति : पूरे ब्रह्मांड का रूप। 103 विश्वरुपा : ब्रह्मांड- हित के लिए रूप धारण करने वाले। 104 विश्वात्मा : ब्रह्मांड की आत्मा। 105 वृषपर्व : धर्म के भगवान। 106 यदवेंद्रा : यादव वंश के मुखिया। 107 योगि : प्रमुख गुरु। 108 योगिनाम्पति : योगियों के स्वामी।

श्रीकृष्ण चालीसा

श्री कृष्ण चालीसा (Shri Krishna Chalisa in Hindi) ॥दोहा॥ बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम॥ पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज। जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज॥ जय यदुनंदन जय जगवंदन।जय वसुदेव देवकी नन्दन॥ जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥ जय नटनागर, नाग नथइया॥ कृष्ण कन्हइया धेनु चरइया॥ पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो। आओ दीनन कष्ट निवारो॥ वंशी मधुर अधर धरि टेरौ। होवे पूर्ण विनय यह मेरौ॥ आओ हरि पुनि माखन चाखो। आज लाज भारत की राखो॥ गोल कपोल, चिबुक अरुणारे। मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥ राजित राजिव नयन विशाला। मोर मुकुट वैजन्तीमाला॥ कुंडल श्रवण, पीत पट आछे। कटि किंकिणी काछनी काछे॥ नील जलज सुन्दर तनु सोहे। छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥ मस्तक तिलक, अलक घुँघराले। आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥ करि पय पान, पूतनहि तार्यो। अका बका कागासुर मार्यो॥ मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला। भै शीतल लखतहिं नंदलाला॥ सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई। मूसर धार वारि वर्षाई॥ लगत लगत व्रज चहन बहायो। गोवर्धन नख धारि बचायो॥ लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई। मुख मंह चौदह भुवन दिखाई॥ दुष्ट कंस अति उधम मचायो॥ कोटि कमल जब फूल मंगायो॥ नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें। चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें॥ करि गोपिन संग रास विलासा। सबकी पूरण करी अभिलाषा॥ केतिक महा असुर संहार्यो। कंसहि केस पकड़ि दै मार्यो॥ मातपिता की बन्दि छुड़ाई ।उग्रसेन कहँ राज दिलाई॥ महि से मृतक छहों सुत लायो। मातु देवकी शोक मिटायो॥ भौमासुर मुर दैत्य संहारी। लाये षट दश सहसकुमारी॥ दै भीमहिं तृण चीर सहारा। जरासिंधु राक्षस कहँ मारा॥ असुर बकासुर आदिक मार्यो। भक्तन के तब कष्ट निवार्यो॥ दीन सुदामा के दुःख टार्यो। तंदुल तीन मूंठ मुख डार्यो॥ प्रेम के साग विदुर घर माँगे।दर्योधन के मेवा त्यागे॥ लखी प्रेम की महिमा भारी।ऐसे श्याम दीन हितकारी॥ भारत के पारथ रथ हाँके।लिये चक्र कर नहिं बल थाके॥ निज गीता के ज्ञान सुनाए।भक्तन हृदय सुधा वर्षाए॥ मीरा थी ऐसी मतवाली।विष पी गई बजाकर ताली॥ राना भेजा साँप पिटारी।शालीग्राम बने बनवारी॥ निज माया तुम विधिहिं दिखायो।उर ते संशय सकल मिटायो॥ तब शत निन्दा करि तत्काला।जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥ जबहिं द्रौपदी टेर लगाई।दीनानाथ लाज अब जाई॥ तुरतहि वसन बने नंदलाला।बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥ अस अनाथ के नाथ कन्हइया। डूबत भंवर बचावइ नइया॥ सुन्दरदास आ उर धारी।दया दृष्टि कीजै बनवारी॥ नाथ सकल मम कुमति निवारो।क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥ खोलो पट अब दर्शन दीजै।बोलो कृष्ण कन्हइया की जै॥ ॥दोहा॥ यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि। अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥ इन्हें भी पढ़ेंः-