Monday, 28 October 2019

राम अष्टक

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशव ।
गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा ।।

हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते ।
बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम् ।।

आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम् ।
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव सम्भाषणम् ।।

बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम् ।
पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि रामायणम् ।।

 

जय धन्वंतरि देवा आरती

जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।

जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।जय धन्वं.।।

देवासुर के संकट आकर दूर किए।।जय धन्वं.।।

आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।

सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।जय धन्वं.।।

भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।

आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।जय धन्वं.।।

तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।

असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।जय धन्वं.।।

हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।

वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।जय धन्वं.।।

धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।

रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।जय धन्वं.।।

Monday, 14 October 2019

रेणुका मातेची आरती

रेणुका मातेची आरती


जय देवी श्री देवी, रेणुका माते।
आरती ओवाळीतो तुजला शुभचरिते॥
मंदस्मित मधुलोचन, सुंदर ही मूर्ती।
वज्रचुडेमंडित तव, गिरिशिखरे वसती॥१॥


जय देवी श्री देवी, रेणुका माते।
आरती ओवाळीतो तुजला शुभचरिते॥
भाग्यवती तूं जननी, परशुरामाची।
तेहतीस कोटी देवांवरि, तव सत्ता साची॥२॥

जय देवी श्री देवी, रेणुका माते।
आरती ओवाळीतो तुजला शुभचरिते॥
सीता, लक्षी, पार्वती, यल्लम्मा सारी।
तुझीच नाना नावें नाना अवतारी॥३॥

जय देवी श्री देवी, रेणुका माते।
आरती ओवाळीतो तुजला शुभचरिते॥
जगदेश्वरी जगदंबे, व्यापिसी विश्वाला।
मिलिंद माधव भावे वंदितसे तुजला॥४॥

जय देवी श्री देवी, रेणुका माते।
आरती ओवाळीतो तुजला शुभचरिते॥

Saturday, 28 September 2019

दुर्गा सप्तशती मंत्र

आपत्त्ति से निकलने के लिए:

शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तु ते ॥

भय का नाश करने के लिए:

सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिमन्विते ।
भये भ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमो स्तु ते ॥

पढ़े : माँ दुर्गा के नौ रूप की महिमा

जीवन के पापो को नाश करने के लिए:

हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

बीमारी महामारी से बचाव के लिए:


रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

पुत्र रत्न प्राप्त करने के लिए:


देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥

इच्छित फल प्राप्ति:


एवं देव्या वरं लब्ध्वा सुरथः क्षत्रियर्षभः

महामारी के नाश के लिए:


जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तु ते ॥

शक्ति और बल प्राप्ति के लिये:


सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तु ते ॥

इच्छित पति प्राप्ति के लिये:


ॐ कात्यायनि महामाये महायेगिन्यधीश्वरि ।
नन्दगोपसुते देवि पतिं मे कुरु ते नमः ॥

इच्छित पत्नी प्राप्ति के लिये:

पत्नीं मनोरामां देहि मनोववृत्तानुसारिणीम् ।
तारिणीं दुर्गसंसार-सागरस्य कुलोभ्दवाम् ॥

Friday, 27 September 2019

मंगल रूप जो मंगल करते मंगलमय भगवान है,

मंगल रूप जो मंगल करते मंगलमय भगवान है,
वो पवन पुत्र हनुमान है वो महावीर हनुमान है,

बाल रूप अति मोहक प्यारा भूल से भानु मुख में ढाला,
घोर अँधेरा हुआ जगत में लीला रची महान है,
वो पवन पुत्र हनुमान है वो महावीर हनुमान है,

माँ सीता को खोज के आये रावण की लंका को जलाये,
कोई न टिकने पाये सन्मुख चूर किया अभिमान है,
वो पवन पुत्र हनुमान है वो महावीर हनुमान है,

लक्ष्मण राम को प्राण से प्यारा मेघनाथ ने वान दे मार ,
पर्वत द्रोण गिरी ले आये जान में आई जान है,
वो पवन पुत्र हनुमान है वो महावीर हनुमान है,

कार्तिक सतगुरु लाल मनाये संग पुखराज के अर्ज लगाये,
लाल लंगोटा हाथ में सोटा ये जिनकी पहचान है,
वो पवन पुत्र हनुमान है वो महावीर हनुमान

सुंदर फल जिस पाठ का,उसका सुन्दरकाण्ड है नाम,

तर्ज : कितना बदल गया इंसान

सुंदर फल जिस पाठ का,उसका सुन्दरकाण्ड है नाम,
सुनकर खुश होते श्रीराम,सुनकर खुश होते हनुमान,
रामचरितमानस और तुलसीदास को करो प्रणाम,
सुनकर खुश होते श्रीराम,सुनकर खुश होते हनुमान,

पढ़ो इसे सब ध्यान लगाकर,नित नव अर्थ है होते उजागर,
पाठ करें जब जब प्रेम गाकर,सुनते हैं हनुमानजी आकर,
राम कथा होती है जहां वहां आते हैं हनुमान...सुनकर...

प्रेम भक्ति के इसमें में खजाने जो,पढ़ता वो ही ये जाने,
कर्मवीर बजरंगबली की बुद्धिमता ये पाठ बखाने,
सिया सुधी लाए लंका जलाए,किया नहीं अभिमान...सुनकर...

सियाराम लक्ष्मण की गाथा,बानर भालू भी हैं साथा,
भक्त विभीषण को निर्भय कर,शरण में लेते हैं रघुनाथा,
पाठ समापन पर रामेश्वर सेतुबंध निर्माण...सुनकर...

शिव के निकट जो इसको गाए,हरिहर की कृपा वो पाए,
क्योंकि भोले शंकर भी तो,सदाराम का ध्यान लगाएं,
इसका पठन-पाठन भी ‘‘पवन’’ कहे,स्वयं है एक वरदान...सुनकर...

Monday, 23 September 2019

श्रीदत्तगुरुंची जूनी आरती

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*श्री दत्तगुरूंची जुनी आरती, अलीकडे कुठल्याही आरती संग्रहात नसते म्हणून आज मुद्दाम  audio सह देत आहे.*
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*श्रीगुरू दत्तराज मूर्ती ओवाळितो प्रेमे आरती*
*ब्रह्मा विष्णू शंकराचा असे अवतार श्रीगुरूंचा*
*कराया उद्धार जगाचा जाहला बाळ अत्री ऋषींचा*
*धरीला वेष असे यतीचा मस्तकी मुगुट शोभे जटेचा*
*कंठी रूद्राक्ष माळ धरूनी*
*हाता मधे आयुध बहुत भरूनी*
*तेणें भक्तांची क्लेश हरूनी*
*त्यासी करूनी नमन, होय अती शमन, होय रिपू दमन असे त्रैलोक्यावरती ॥*
*गाणगापुरी वस्ती ज्याची प्रीती औदुंबर छायेची*
*भीमा अमरजा संगमाची भक्ती असे बहुत सुशिष्यांची*
*वाट दावूनिया योगाची ठेव देतसे निजमुक्तीची*
*काशी क्षेत्री स्नान करीतो*
*करवीरी भिक्षेला जातो*
*माहूर निद्रेला वरी तो*
*तरतरीत छाती, झरझरीत नेत्र, गरगरीत शोभतो त्रिशूल जया हाती ॥*
*अवधूत स्वामी सुखानंदा ओवाळीतो सौख्य कंदा*
*तारी या दास रूदनकंदा सोडवी विषय मोह छंदा*
*आलो शरण अत्रीनंदा दावी सद्गुरू ब्रह्मानंदा*
*चुकवी चौ-यांशीचा फेरा*
*घालिती षड्ररिपू मज घेरा*
*गांजिती पुत्र पौत्र दारा*
*वदवी भजन मुखी, तव पुजन, करीतसे सुजन, जयाचे बलवंता वरती ॥*
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